मच्छर परिवार बहुत परेशान था दिन पर दिन महंगाई बढ़ती जा रही थी और परिवार के सब प्राणी अब तक बेरोजगार थे आखिर मांग मांग कर कब तक गाड़ी खिचती फिर कोई कब तक किसी को देता रहेगा मच्छरी ने अपने पति को सलाह दी कि क्यों न कोई धंधा चालू कर दिया जाए बैठे बैठे कौन खिलाएगा बच्चे भी बड़े हो रहे हैं दस बच्चों को मिलाकर हम लोग बारह लोग हैं धंधा करेंगे तो घर के सब लोग ही व्यापार संभाल लेंगे और नौकरों की भी जरूरत नहीं पड़ेगी सलाह तो तुम्हारी उचित है परंतु कौन-सा धंधा करें धंधे में पूंजी लगती है जो हमारे पास है नहीं मच्छर बोला ऐसे बहुत से धंधे हैं जिसमें थोड़े सी पूंजी में ही काम चल जाता है क्यों न हम पान की दुकान खोल लें पूंजी भी नहीं लगेगी सुबह थोक सामान ले आएंगे और शाम को बिक्री में से उधारी चुका देंगे मच्छरी ने तरीका सुझाया गोवा में भाजपा विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ फेसबुक पर भगवान गणेश के माध्यम से हमला कर रहें हैं विधायक विष्णु बाग ने अपने एकाउंट पर राज्य सरकार के खिलाफ लिखे व्यंग्यात्मक अंदाज में वीडियो को अपलोड किया है उन्होंने भगवान गणेश के पेट की ओर इशारा करके सरकार से जानना चाहा कि एक साल के भीतर राज्य सरकार ने गरीबों के पेट के लिए क्या किया है उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा खाद्य सुरक्षा बिल के लागू हो जाने के बाद अब गरीबों को भी भर पेट भोजन का अधिकार मिल गया है ओ संपूरण मुझे एक बात तो बता तूने आखिर इतने बरसों में सीखा क्या इतना तेरा नाम है कैसी बांकी मन मोहिनी तेरी शक्ल है एक सौ बीस फिल्मों के तूने गाने उन्नीस फिल्मों के डायलॉग और इतनी ही फिल्मों की कहानियां लिखीं बाइस फिल्मों का निर्देशन किया दो फिल्में जेब से बनाईँ मिर्जा गालिब समेत तीन टीवी सीरियल पैदा किए बारह म्यूजिक एल्बम पेश किए इकत्तीस फिल्म फेयर अवॉर्ड एक ऑस्कर एक ग्रैमी और एक पद्म भूषण सीने पर टांग लिया तीन शायरी के संग्रह और एक कहानी संग्रह छाप मारा एक जहीन बेटी को दुनिया में लाया अपने आप रातों को सीढ़ियां धड़कती हैं चौंकते हैं दरवाजे जैसी तिलिस्मी लाइन नग्मे में डाल दी पर नहीं सीखा तो जिंदगी को गुजारने का क ख ग नहीं सीखा तुझे अब दीने जाने की आखिर क्या जरूरत पड़ गई थी वहां क्या रखा है हो गया ना एक दफा पैदा तू हो गया एक दफा बंटवारा धकेल दिया गया ना तेरे जैसा लाखों परिवारों को इधर से उधर और उधर से इधर अब क्यों अपने और दूसरों के जख्मों को कुरदने में लगा है सात दिन तुझे रहना था पाकिस्तान में रहता लाहौर की हिप्पी गोलकियों के बीच और कराची के साहित्य मेले में और फिर बंद घरों में अय्याशी के साथ देता अपनी मर्जी के चैनलों को इंटरव्यू करता मीठी मीठी मुलायम बातें और सवार हो जाता जहाज में अपनी नम आंखों के साथ यहां की आओ भगत की तारीफें करते करते जब तूने इन लाइनों वाली नज्म भी लिख दी थी कि आंखों को वीजा नहीं लगता बंद आंखों से रोज सरहद पार चला जाता हूं सपनों की सरहद कोई नहीं तो इसके बाद खुली आंखों दीना जाने की क्या जरूरत आन पड़ी थी तेरा क्या ख्याल था कि वहां जो बच्चे तेरे साथ लकन मिटी खेलते थे उनकी उम्रें जम गई होंगी वो पेड़ जिन्हें तेरा नाम याद था उनकी यादाश्त और यादें ताजा होंगी जिस आंगन में तू दौड़ता था उसकी ईंटों का रंग वैसा ही लाल लाल होगा जिस कमरे की दीवारें तेरी नवंबर को हिन्दी ब्लॉग जगत के सार्वजनिक उपक्रम चिट्ठा चर्चा ने अपनी एक हजारवीं पोस्ट छापी सुगबुगाहट बनी हुई थी और इतने दिनों के सन्नाटे के बाद मैंने अनूप को वादा किया इस अवसर पर अपनी राय लिखने का पर जैसा की किसी के साथ होता है यह पोस्ट अब आप तक पहुंच रही है वैसे भी ट्विटर की आदत पड़ने के बाद बड़ी पोस्ट लिखना दुश्कर हो गया है चिट्ठा चर्चा शायद एकमात्र ब्लॉग है जिसकी हर पोस्ट मैंने हमेशा पढ़ी है इसका मुख्य कारण है कि इस ब्लॉग की हर पोस्ट प्रकाशित होने पर मुझे ईमेल द्वारा मिलती है पर मैंने इससे कभी अनसब्सक्राईब नहीं किया हिन्दी चिट्ठे पढ़ना लगभग छोड़ने के बावजूद चिट्ठा चर्चा की शुरुवात के किस्से आप पढ़ चुके हैं पर इसे शुरु करने का कारण प्रतिशोध नहीं एक क्षोभ था कि अंग्रेजी ब्लॉग वालों ने हमें बिरादरी बाहर कर दिया था इस बात का प्रमाण यही है कि चिट्ठा चर्चा का प्रारूप ब्लॉग मेला से पूर्णतः अलग था पाकिस्तान में कोई भी वकील साल के बाद ज़ुल्फ़िकर अली भुट्टो के मुक़दमे को अदालत में संदर्भ के रुप में पेश नहीं करता इसी तरह क्या अफ़ज़ल गुरु के फ़ैसले को कोई भी चोटी का भारतीय वकील किसी भी अदालत के सामने कानूनी मिसाल के रुप में दे कर किसी भी अभियुक्त के लिए मौत की मांग करेगा उन्नीसवीं सदी के अंतिम दशक में कैप्टन ड्रेफ़स पर आरोप था कि उसने राष्ट्रीय रहस्य जर्मनों के दे किए बाद में पता चला कि यह काम वास्तव एक अन्य अधिकारी ने किया था जिसे बचाने के लिए सैन्य अदालत ने ड्रेफ़स को आजीवन कारावास की सज़ा सुना दी थी पांच साल बाद जब सच सामने आया तो ड्रेफ़स को सम्मान के साथ सेना में उनके पद पर बहाल कर दिया गया इस प्रकार फ्रांसीसी सेना के एक दल की यहूदी विरोधी भावना को संतुष्ट करने की कोशिश को उदार फ्रांसीसी समाज ने खिड़की से बाहर फेंक दिया बीसवीं सदी के सातवें दशक में ज़ुल्फिकार अली भुट्टो को इस तथ्य के बावजूद मौत की सज़ा सुनाई गई कि भुट्टो अपराध में सीधे शामिल नहीं थे अदालत का फ़ैसला सर्वसम्मत नहीं बल्कि विभाजित था फिर भी उस समय की लोकतंत्र विरोधी सैन्य सरकार ने जनता की आत्मा की संतुष्टी के लिए भुट्टो को फांसी पर लटका दिया गया लेकिन आज तक इस फ़ैसले का फूली लाश पाकिस्तान की राष्ट्रीय अंतरात्मा पर बोझ बनी तैर रही है मोहम्मद अफ़ज़ल गुरु को दिसंबर को भारतीय संसद पर हमले के दो दिन बाद हमले में सीधे शरीक ना होने के बावजूद पकड़ा गया था उनके साथ एसएआर गिलानी, शौकत गुरू और उसकी पत्नी अफ़शां को भी हिरासत में लिया गया था पुलिस ने अफ़ज़ल के कब्जे से पैसे एक लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन भी खोज लिया लेकिन उन्हें सीलबंद करना भूल गई लैपटॉप में सिवाय गृह मंत्री के जाली अनुमति पत्र और संसद में प्रवेश के अवैध पासों के अलावा कुछ नहीं निकला शायद आरोपी ने सब कुछ डिलिट कर दिया था सिवाय सबसे महत्वपूर्ण सबूतों के जाने क्यों अफ़ज़ल को पूरे हिंदुस्तान से उसकी पसंद का एक वकील भी नहीं मिला सरकार की ओर से एक जूनियर वकील दिया गया उसने भी अपने मुवक्किल को कभी गंभीरता से नहीं लिया एक आम आदमी से अफ़ज़ल के आतंकवाद की ओर आकर्षित होने फिर प्रायश्चित करने प्रायश्चित करने के बावजूद सुरक्षा बलों के हाथों बार बार दुर्व्यवहार का शिकार होने और दुर्व्यवहार के बावजूद एक पढ़े लिखे नागरिक की तरह जीवन गुज़ारने की गंभीर प्रयासों की कहानी पर ऊपर से नीचे तक किसी भी अदालत ने कान धरने की कोशिश नहीं की