अदालती सुनवाई बेशक जोधपुर में थी लेकिन गुरुवार को उसकी हलचल शाहजहांपुर में साफ दिखी जैसे ही आसाराम बापू की आश्रम के खाने समेत सभी मांगें और उनकी शिष्या शिल्पी की अग्रिम जमानत कोर्ट ने ठुकराई, पीड़ित परिवार खुशी झूम उठा चेहरे पर सुकून के भाव दिखे तो केस को अंजाम तक पहुंचाने का जज्बा भी पढ़ें: आसाराम प्रकरण: पीड़िता की मां ने रखा उपवास, कहा- कोर्ट का ही सहारा फैसला आने के तुरंत बाद दुष्कर्म पीड़ित छात्रा के पिता ने कहा-सच की कभी हार नहीं होती, इसके दम पर ही हम एक और लड़ाई जीते हैं अब तो आसाराम को सजा दिलाकर दम लेंगे गुरुवार को होने वाली सुनवाई को लेकर सुबह से पीड़ित छात्रा के परिवार में गहमागहमी शुरू हो गई समर्थकों के फोन आने लगे वहीं पीड़ित छात्रा और उसके माता-पिता पूजा पाठ में जुट गए उसके बाद निगाहें टीवी पर रहीं जैसे ही दिन में करीब चार बजे यह फैसला आया कि अदालत ने आसाराम बापू की आश्रम का खाना खाने समेत अन्य मांगों को खारिज कर दिया है शिल्पी की अग्रिम जमानत अर्जी भी नामंजूर कर दी, पूरा परिवार खुश हो गया बिटिया के चेहरे पर भी खुशी का भाव तैरने लगे और मां को गले लगा लिया बोली-हम बापू को छोड़ेंगे नहीं मां.. 'जागरण' से बातचीत में छात्रा की मां ने बताया कि चौबीस घंटे का उपवास रखा था आखिरकार ईश्वर और अदालत दोनों ने हमारी सुन ली मुझे तो शिल्पी और आसाराम को सजा होने पर ही खुशी मिलेगी शिल्पी ही असली गुनहगारशाहजहांपुर पीड़िता की मां ने यह भी कहा कि असल में शिल्पी की जमानत खारिज होने से मन का बोझ हल्का हो गया बेटी की पहली गुनाहगार तो शिल्पी ही है, जिसने में सात अगस्त को कॉल करके बेटी को बुलाया और षडयंत्र के तहत आसाराम बापू के पास भेज दिया नारी होकर अबला की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाली शिल्पी ने शिक्षक (वार्डेन) के पद को भी कलंकित कर दिया