इस पर एक और दुर्घटना हो गई वह व्यक्ति ज्योंही शेरों के कठघरे में

घुसने लगा उसका पांव फिसल गया और वह गिर पड़ा उसके गिरते ही अपरिचित

तेरह शेर एक साथ उसपर टूट पड़े और काटने लगे

तेरह शेरों को उस व्यक्ति के प्राण लेते शायद तेरह क्षण भी न लगते पर

उसके प्राण बच गए उस व्यक्ति के अपने सिखाए हुए शेरों में जो सबसे बड़ा

शेर था वह अपने शिक्षक के प्राणों की रक्षा के लिए आ अड़ा और उन

आक्रमणकारी शेरों पर टूट पड़ा इससे सरकस के प्रबन्धकों को इतना अवसर मिल

गया कि वे घायल व्यक्ति को कठघरे में से निकाल सकें रक्षक शेर भी बुरी

तरह घायल हो गया परन्तु गुरू शिष्य दोनों के ही जीवन शेष थे शिक्षक पांच

मास हस्पताल में पड़ा रहने के बाद स्वस्थ हो गया और उसने फिर कई वर्ष तक

अपने प्राणरक्षक उसी शेर के साथ खेल दिखाए

आखिर एक समय आता है जब शेर बूढ़ा हो जाता है उसकी फुर्ती समाप्त हो

चलती है दांत कमज़ोर हो जाते हैं तब वह जंगली पशुओं को पकड़ने में

असमर्थ होकर गांवों के पालतू पशुओं की ओर अपनी दया दृष्टि फेरता है

क्योंकि उन्हें पकड़ना सरल होता है

कभी ऐसा भी होता है कि अपने पशुओं की रक्षा करता हुआ कोई मनुष्य उसके हाथ

लग जाता है या किसी और दुर्घटना में मनुष्य उसका शिकार बन जाता है बस

उसी दिन से शेर और प्राणियों को खाना बन्द कर देता है तब से उसका सारा

प्रयत्न यही रहता है कि जैसे भी हो मनुष्य को ही पकड़कर ख़ा या जाए कारण

एक तो मनुष्य का मांस अपेक्षाकृत नरम और स्वादिष्ट होता है और दूसरे

मनुष्य को मारना और सब प्राणियों की अपेक्षा अधिक सरल है ऐसा शेर

नर भक्षक कहलाता है

नर भक्षक शेर बहुत ही भयंकर होता है निशंक भाव से रात में यह गांव में

आता है मकानों के दरवाज़े तक तोड़कर उनमें से पुरूषों स्त्रियों और

बच्चों को उठा ले जाता है शेर नित्यप्रति भोजन नहीं करता फिर भी ऐसे

नर भक्ष कों द्वारा दो दो सौ व्यक्तियों के खाए जाने के उदाहरण मिलते हैं

आखिर एक दिन किसी शिकारी की ही गोली गांव के लोगों का इस संकट से उद्धार

करती है

शेरनी एक बार में दो से छ बच्चे देती है पर प्राय इनकी संख्या तीन

होती है शेरनी अपने बच्चों से बड़ा स्नेह करती है और संकट पड़ने पर जान

पर खेलकर भी उनकी रक्षा करती है जब तक बच्चे छोटे होते हैं तबतक वह

उनके लिए शिकार करके लाती है और धीरेधीरे उन्हें शिकार करना भी सिखाती

है

परन्तु पर्यवेक्षक ों ने यह भी लिखा है कि कई बार शिकारियों द्वारा घेरे

और डराए जाने पर वह बच्चों को छोड़ भी जाती है और कई बार शिकार न मिलने

पर बहुत भूखी होने पर उन्हें खा भी जाती है

शेर कहने से केसरी या बबर शेर का अभिप्राय होता है जिसके मुख गर्दन और

कन्धों पर शानदार बाल होते हैं और देह के शेष चमड़े पर किसी प्रकार की

धारियां या चित् तियां नहीं होतीं उसका मुख भी कुछ बड़ा भारी और देखने

में बहुत कुछ मनुष्य के मुख से मिलता सा है उसकी यह गौरवपूर्ण देह रचना

ही उसे वन का सम्राट कहलवाती है नहीं तो वन का असली सम्राट् तो बाघ

है जिसकी गर्दन पर बाल नहीं होते और देह के चमड़े पर काले रंग की लम्बी

धारियां होती हैं इसका मुख कुछ छोटा देखने में क्रूर और भयंकर तथा देह

अधिक गठा हुआ होता है साधारणतया लोग शेर और बाघ दोनों के लिए ही शेर

शब्द का प्रयोग करते हैं

हिमालय के वनों में एक समय शेर काफी संख्या में पाए थे परन्तु आज इन

विशाल विस्तृत वनों में शेरों का चिह् रह गया है और उसके स्थान पर

विशालकाय धारीदार बाघ रह जाते हैं पर्यवेक्षक ों का कथन है कि वल छल और

कौशल से बाघों ने सिंहों को परास्तकर के मार दिया और खा डाला निश्चय ही

बाघ सिंह से अधिक श इत शाली होता है और सभी से फुर्ती में भी कम नहीं

होता

यह शेर की अपेक्षा क्रूर भी अधिक होता है शेर के बारेमे यह समझा जाता

है कि वह प्राणियों पर अकारण आक्रमण नहीं करता परन्तु बाघ भूखा न होने पर

भी प्राणियों पर आक्रमण करके मार देता है

बाघ के मुख्य शस्त्र दांत और पंजे हैं उसकी अगली जिन्हें हाथ या बांह

कहना चाहिए गोलाई में उन्नीस इंच मोटी हैं अर्थात् साधारणतया मनुष्य की

जांघ जितनी मोटी है उतनी इसके अन्दर संसार की कठोरतम हड्डी होती है और

मजबूत पेर और स्नायु तन्तुओं से कन्धे के साथ जुड़ी होती है इस बांह के

भाग पर बाघ का विशाल पंजा होता है इसकी आरपार लम्बा इंच होती है यदि

पूरे कद काव्य इत अपने हाथ की सब उंगलियां फैलाकर अपना पंजा देखे

तो उससे कुछ थोड़ा सा बड़ा बाघ का पंजा होता है अनेक बार वन में घूमते

हुए हमने सीली रेत भूमि पर बाघ के पंजे के बढ़िया स्पष्ट निशान देखे हैं

और कई बार वे इतने बड़े होते थे कि हमारे साथियों में से किसी का पंजा

उनको ढांप नहीं पाता था

परन्तु बाघ के पंजे में हमारे पंजों की भांति लम्बी लम्बी कमजोर

अंगुलियां नहीं होतीं छोटी और मोटी अंगुलियां होती हैं उनके आगे डेढ़

से दो इंच तक लम्बे घुमावदार अटूट और पैने नाखून होते हैं इनसे वह

घोड़े बैल भैंस का चमड़ा उतनी ही सरलता से फाड़ सकता है जितनी सरलता

से हम पके संतरे का छिलका उतार देते हैं

अब यदि आप कल्पना करना चाहते हैं तो अपनी छाती या पेट पर अपना पूरा पंजा

फैलाकर रखिए क्योंकि और सारे शरीर से इतना बड़ा स्थान दूसरा नहीं है और

कल्पना कीजिए कि प्रत्येक अंगुली के आगे मज़बूत और पैना नाखून लगा हुआ

है जो मांस के अन्दर सीधा डेढ़ इंच गहरा जा सकता है तब आप समझ सकते हैं

बाघ का पंजा क्या चीज है

