हमारे मित्र पं हरिवंश एक बार एक खारा के जंगल में जा रहे थे लगभग शाम

के साढ़े चार बजे का समय होगा भाला उनके हाथ में था और जल्दी जंगल से

बाहर हो जाएं इस इच्छा से वे तेज़ी से कदम बढ़ाए चले जा रहे थे इतने

में कोई बीसपचीस कदम दूर पर सरकंडों ओर झाड़ियों में किसी प्राणी के

चलने की आवाज आई

उत्सुकतावश मैं एक ओर को दुबक गया उन्होंने सुनाया  और मैं सोच ही

रहा था कि अब किसी हिरन का पतलासा मुंह झाड़ियों से बाहर निकलेगा पर

मैं धक् से रह गया जब मैंने शेर का चौड़ा और भारी मुंह झाड़ियों से बाहर

निकलते देखा मेरे रोंगटे खड़े हो गए

शेर कच्ची सड़क को पार करना चाहता था पर पार करने से पहले वह एक क्षण

रूका मैं जानता था कि ऐसे समय भाग पड़ने से अधिक खतरनाक कोई बात नहीं

है शरीर पूरा अपने बस में नहीं मालूम हो रहा था पर मैंने ऐसा प्रदर्शित

किया जैसे मैंने शेर को देखा नहीं है और थोडासा खांसा

खांसने की आवाज़ सुनते ही शेर वहीं झाड़ियों में दुबक गया और जिस ओर से

आया था फिर उसी ओर लौट गया पर फिर भी उस ओर सड़क पर बढ़ते हुए मुझे

बड़ा भय लग रहा था

इसका एक कारण सम्भवत: यह भी है कि शेर को दिन में बहुत कम दीखता है दिन

में उसकी वह दशा होती है जो हमारी रात में इसलिए वह दिन में अपनेआपको

विषम स्थिति में अनुभव करता है रात में किसी मनुष्य के साथ ऐसा उदार

व्यवहार करने का विवरण अभी हमें नहीं मिला

परन्तु मनुष्य से साधारणतया मोर्चा लेनेवाला शेर तब बहुत भयंकर बन जाता

है जब किसी कारण उसे या उसके बच्चों को छेड़ा जाए ऐसे शिकारियों के

उदाहरण कम नहीं हैं जब कि उनका शिकार तो शिकारी बन गया और वे स्वयं उसके

शिकार बन गए गोली खाकर शेर पन्द्रह फुट तक ऊंचा कूद सकता है यदि गोली

मर्मस्थल पर न लगे तो घोड़े पर चढ़कर भागनेवाला शिकारी अपने प्राणों की

आशा नहीं कर सकता इस विशालकाय प्राणी की एक ही थाप घोड़े और घुड़सवार

दोनों के लिए पर्याप्त होती है

यदि शेर उत्तेजित न हो चुका हो तो उसे शोर मचाकर डराया भी जा सकता है

परन्तु चोट खाकर उत्तेजित हुआ शेर यमदूत की भांति निर्मम हो जाता है वह

सौ मनुष्यों के समूह पर भी आक्रमण कर सकता है

पानी में कूदकर आप शेर के चगुल से नहीं बच सकते अगर वह सचमुच ही आपका

पीछा कर रहा है शेर आपसे कहीं अधिक अच्छा तैराक है और पानी में तैरते

हुए भी आक्रमण करने की साम्थर्य रखता है

परन्तु इतना भयंकर और हिंस्र होते हुए भी यदि बचपन से ही यत्न किया जाए

तो शेर को पाला भी जा सकता है हममें से सम्भवत: सभीने सरकसों में और

सिनेमाओं में लोगों को पालतू शेरों के साथ नाना प्रकार के खेल करते देखा

होगा ये मनुष्य कई बार तो इतना साहस करते हैं कि अपना सिर शेर के मुंह

में दे देते हैं इन खेलों के लिए शेरों को बचपन से ही खास ढंग से

शिक्षित किया जाता है

मुझे एक साधु का ध्यान आता है उसे हमने शिमला में देखा था बाद में वह

बंबई आदि अनेक स्थानों में घूमता फिरा उसने एक शेर बाघ पाला हुआ था

जिसे वह सिर्फ दूधरोटी खिलाता था उसके कहने से शेर एक प्रकार की आवाज़

भी करता था जिसे साधु कहता था कि यह `ओउम्' कहता है

अधिकांश पशुओं पर पालतू हो जाने पर विश्वास किया जा सकता है परन्तु

पशुराज पर नहीं जिस साधु के शेर की चर्चा मैंने ऊपर की है उसके बारे

में बाद में अखबारों में पढ़ा कि शेर ने दो आदमियों को मार डाला पूछने

पर सरकस में शेर के साथ खेल करने वालों ने भी बताया कि इस प्राणी पर

विश्वास न करना ही ठीक है कई बार ऐसा हुआ कि आदमी ने खेल दिखाने के लिए

शेर के मुंह में सिर रखा और शेर ने मुंह बन्द कर लिया

एक बार एक सरकस में एक मनुष्य को उन्नीस शेरों के साथ खेल दिखाना था पर

इन उन्नीस में से केवल छ: शेर उसके अपने शिक्षित किए हुए थे और बाकी

दूसरे लोगों के यह बड़ा खतरनाक आयोजन था क्योंकि पालतू शेर भी अपने

शिक्षक के ही प्रति उदार होता है

