सूर्य छिप गया है जंगल के ऊपर रात का अन्धकार तेज़ी से उतर रहा है

लम्बे और ऊंचे वृक्ष घनी कंटीली झाड़ियां और ऊंचीऊंची घास स्तब्ध भाव

से अन्धकार का स्वागत कर रहे हैं ग्वाले और लकड़हारे लौटकर जा चुके हैं

अब वन में वनचरों का राज्य प्रारम्भ हुआ है

झींगुरों ने अपनी तीखी कर्णकटु तान छेड़ दी है आकाश में चिमगादड़ों के

झुण्ड उड़ने प्रारम्भ हो गए हैं कभी सन्नाटे को भेदती हुई किसी हिरन के

बोलने की आवाज़ सुन पड़ती है और कभी कोई गीदड़ हुआ हू कर उठता है

वह लो काकड़ बोला अब शेर आसपास ही कहीं है जैसे बादल गरजता हो ऐसे

स्वर में शेर दहाड़ता है पहली दहाड़ कुछ धीमी होती है दूसरी उससे काफी

ऊंची तीसरी उससे भी ऊंची और चौथी दहाड़ में सारा वन कांपने लगता हैं

झींगुर की झंकार तक बन्द हो जाती है वन का एकएक प्राणी अपने प्राण

बचाने को आतुर हो उठता है वन में जहां कहीं शिकारियों का डेरा होता है

उनके ह्रदय भी भय से धुक्धुक् करने लगते हैं

परन्तु एक प्राणी की मृत्यु आई है वन का राजा भूखा नहीं रहेगा कोई एक

अभागा प्राणी किस्मत का भेजा हुआ शेर के आसपास से गुज़रता है और तभी

बिजली की तेज़ी से शेर उसपर टूट पड़ता है

शेर की थाप संसार के भयंकरतम आघातों में से एक है पशुजगत में ह्वेल की

पूंछ जिराफ की लात और शेर की थाप के आघात सबसे अधिक भयंकर समझे जाते

हैं जब साड़े चार मन वज़न का शेर बिजली की तेजी से शिकार पर टूटता है

तब उसकी तुलना विशालकाय बिजली के हथौड़े से ही की जा सकती है बोझ के

आघात के साथसाथ उसके दोनों पंजों में डेढ़डेढ़ इंच लम्बे पांचपांच

पैने नाखून निकल आते हैं जिनसे वह कड़ी से कड़ी चमड़ी को चीर सकता है

अपनी इस थाप की एक चोट से वह बड़े से बड़े बैल या घोड़े को समाप्त कर

सकता है

परन्तु शेर की वास्तविक शक्ति का अनुमान लगाने के लिए यह पर्याप्त नहीं

है छ फुट ऊंची बाड़ को कूदकर पशुओं के बाड़े में घुस आना और फिर भेड़

या बकरी को मुंह में दबाकर फिर बाड़ को कूदकर वापस चले जाना शेर के लिए

ठीक वैसा ही है जैसे हम संतरा हाथ में लेकर शहर की नाली को कूद जाएं

अफ्रीका में एक शेर एक पूरी गाय को गर्दन से पकड़कर सात फुट ऊंची बाड़ को

पार कर चुका है

इसी अपार शक्ति के बल पर वह जंगल का राजा है और हाथी जैसे अपने से आठ

गुने बड़े प्राणी को भी सरलता से परास्त कर सकता है

शेर बहुत दूर तक बहुत तेज़ी से नहीं दौड़ सकता यही कारण है कि वह हिरन

का पीछा करके उसे नहीं मार पाता परन्तु थोड़ी दूर तक वह अकल्पनीय वेग से

झपट सकता है इसलिए जब कभी वह घात लगाकर शिकार पर झपटता है कोई प्राणी

उससे बचकर नहीं जा सकता

ऐसा प्रतीत होता है कि साहस की भावना केवल मनुष्य में है इसीलिए वह न

केवल संदेह की जगह में बल्कि निश्चित रूप से संकट की जगह में भी बढ़ा

चला जाता है परन्तु वन का राजा जब तक आदमी के बल शील और स्वभाव को नहीं

जान लेता तब तक वह मनुष्य से डरता है वह मनुष्य से खुला सामना करने में

हिचकता है
