दांत के को भाग होते हैं 
मसूड़े दंतवेष्टि के बाहर रहनेवाला भाग दंतशिखर कहलाता है और जबड़े के उलूल में स्थित गर्म में संनिहित अंश को दंतमूल कहते हैं 
शिखर और मूल का संधिस्थल दंतग्रीवा है 
दांत का मुख्य भाग दंतास्थित है 
दंतास्थि विशेष रूप से आरक्षित न रहे तो जिस जा अतएव दंतशिखर में यह एनिमल नाम एक अत्यंत कडे पदार्थ से की रहती है 
दंतमूल में दंतास्थित का आवरण सीमेंट करती है 
सीमेंट और जबड़े की हड्डी को बीच दंतपर्यास्थित होती है जो दांत को बांधती भी है और गर्म में दांत के लिये गद्दी का भी का करती है 
दंतास्थि के अंदर दंतमज्जा होती है जो उस खोखले हिस्से में रहती है जिसे दंतमज्जागुहा कहते हैं 
इस गुना में रुधिर और लसिकावाहिकाएँ तथा तंत्रिकाएं होती हैं 

के दंतमूल के चोर पर स्थित एक छोटे से छिद्र से दांत में प्रवेश करती हैं 
दांत एक जीवित वस्तु है अतएव से पोषण और चेतना की आवश्यकता होती है 
तंत्रिकाएं दांत को स्पर्शज्ञान प्रदान करती हैं 

एनिमल दांत का सबसे कठोर और ठोस भाग है 
यह दंतशिखर को सकता है 
चर्वणतल पर इसकी पर सबसे मोटी और ग्रीवा के निकट अपेक्षाकृत पहली होती है 
एनिमल की रचना षटकोण प्रिज़्मों से होती है जो दंतास्थि से समकोण पर स्थित होते हैं 
एनिमल में चुने के फॉस्फेट कार्बोनेट मैग्नीशियम फास्फेट तथा अल्प मात्रा में कैलिसयम क्लोराइड होते हैं 
दंतास्थित में बना एकरूप आधारद्रव्य मैट्रिक्स और उसमें लहरदार तथा शाखाविन्याससंयुक्त दंतनलिकाएँ होती हैं 
के नलिकाएं एक दूसरे से समानांतर होती हैं और अंदर की और दंतमज्जागुहा में खुलती हैं 
इनके अंदर अंत तंतु के प्रवर्धन होते हैं 
दंतगुहा में जेल की मज्जा भी होती है 
इसमें ढीला संयोजक तक होता है जिसमें रक्तवाहिकाओं और तंत्रिकाएं होती हैं 
गुना की दीवार के पास डेंटीन कोशिकाओं की पर होती है और इन्हीं कोशिशों के तंतु दंतनलिका में फैले रहते हैं 
सीमेंट की रचना हड्डी की होती है पर इसमें रुधिरवाहिकाएँ नहीं होती 


स्थायी दांत चार प्रकार के होते हैं 
मुख में सामने की और या जबड़ों के मध्य के छेद दांत होते हैं 
के आठ होते हैं चार पर चार नीचे 
इनके दंतशिखर खडे होते हैं 
रुखानी के आकार सदृश के दांत चालू कारवाले होते हैं 
इनका समतल किनारा काटने के लिये धारदार होता है 
इनकी ग्रीवा संकरी तथा मूल लंबा एकाकी नुकीला अनुप्रस्थ में निपटा और बगल में खांचेदार होता है 
भेद दांत चार होते हैं छेदों के चारों और एक एक 
के छेद से बडे और तगड़े होते हैं 
इनका दंतमूल लंबा और उत्तर शिखर बडा शंकुरूप ओर का पहले उत्तर और जिह्वापक्ष कुछ खोखला और खुदरा होता है 
इनका चोर सिमटकर कुंद दंताग्र में समाप्त होता है और यह दंतपंक्ति की समतल रेखा से आगे निकला होता है 
भेद दंतमूल शंकुरूप एकाकी एवं खांचेदार होता है 
अग्रचर्वणक आठ होते हैं और को को की संख्या में भेदों के पीछे स्थित होते हैं 
के भेदों से छोटे होते हैं 
इनका शिखर आगे से पीछे की और सिमटा होता है 
शिखर के माथे पर एक खांचे से विभक्त को पिरामिड गुलिकाएँ होती हैं 
इनमें ओर की घरवाली गुलिया बडी होती है 
दंतग्रीवा अंडाकार और दंतमूल एक होता है सेवा पर के प्रथम अग्रचर्वणक के जिसमें को मूल होते हैं 
चर्वण स्थायी दांतों में सबसे बडे चौडे शिखरयुक्त तथा चर्वण क्रिया के लिये विशेष रूप से समंजित होते हैं 
इनकी संख्या होती है अग्रचर्वणकों के बाद से और तीन तीन की संख्या में 
इनका शिखर घनाकृति का होता है 
इनकी भीतर सतह उत्तर और बाहर लिपटी होती है 
अंत के माथे पर चार या पांच गुलिकाएँ होती हैं 
ग्रीवा स्पष्ट बडी और गोलाकार होती है 
प्रथम चर्वण सबसे बडा और तृतीय अकिलदाढ़ सबसे छोटा होता है 
पर के जबड़े के चर्वणकों में तीन मूल होते हैं जिनमें को साल की और और तीसरा जिह्वा की और होता है 
तीसरे चर्वण के सूत्र बहुधा आप में समेकित होते हैं 
नीचे के चर्वणकों में को मूल होते हैं एक आगे और एक पीछे 




अफ्रीकी हाथ प्रजाति में को या तीन विवादित जीवित जातियां हैं 
जबकि एशियाई हाथ प्रजाति के अंतर्गत केवल एशियाई हाथ ही जीवित जाती है लेकिन से तीन या चार विवादित उपजातियों में विभाजित किया जा सकता है 
अफ्रीकी तथा एशियाई हाथ समान पूर्व से करीब लाख वर्ष पूर्व विभाजित हो गये के 

के हाथ जो लॉक्सोडॉण्टा प्रजाति के अंतर्गत आते हैं और सामूहिक रूप से अफ्रीकी हाथ कहलाते हैं वर्तमान में अफ्रीकी देशों में पाया जाता है 
अफ्रीकी हाथ एशियाई हाथ से के प्रकार से भिन्न होते हैं जिनमें सबसे स्पष्ट उनके बडे का होते हैं 
अफ्रीकी हाथ एशियाई हाथ से आकार में बडे होते हैं और उनकी अतल पीठ होती है 
अफ्रीकी हाथ में और और माना दोनों के हाथीदांत होते हैं और उनकी त्वचा में बाद भी के होते हैं 

अफ्रीकी हाथ परंपरागत रूप से एक जाती के अंतर्गत को उपजातियों में विभाजित किया गया है 
रवाना का हाथ या अफ्रीकी खुश हाथ तथा अफ्रीकी जंगली हाथ लेकिन हाल के की एक एक परीक्षण बताते हैं की वास्तव में यह को अलग जातियां हो सकती हैं 
लेकिन भी विशेषज्ञों द्वारा यह तर्क सामान्य नहीं है 
अफ्रीकी हाथ की एक तीसरी जाती भी प्रस्तावित की गई है जिसे पश्चिमी हाथ की संज्ञा की गई है 

अफ्रीकी खुश हाथ अफ्रीकी जंगली हाथ एशियाई हाथ विलुप्त अमरीकी मॅस्टोडॉन तथा मैमथ के की एक एक विश्लेषण करने वाले वैज्ञानिकों सन् कोई 
में इस निष्कर्ष में पहुंचे की यकीनन अफ्रीकी खुश हाथ तथा अफ्रीकी जंगली हाथ को अलग जातियां हैं 
इस पुनःवर्गीकरण का संरक्षण की दृष्टि से बहुत महत्व है 
भी तक हाथियों को एक ही जाती का मानकर पूरी आबादी का एक साथ ही आंकलन किया जाता था 
लेकिन पुनःवर्गीकरण के बाद किसी जाती विशेष के हाथ की आबादी आंककर यह पता लगाने में सुविधा हो जायेगी की कि जाती के हाथ को संरक्षण अधिक आवश्यकता है क्योंकि जिस हाथ की आबादी संकटग्रस्त की परिभाषा की परिधि में आती है उसके संरक्षण के लिए कानून और सख्त करने पडेंगे और अवैध शिकारियों और तस्करों को संकटग्रस्त उस जाती के जानवरों या उनके शरीर के अंगों के व्यापार में रोक लगेगी 

अफ्रीकी जंगली हाथ तथा अफ्रीकी खुश हाथ परस्पर प्रजनन कर सकते हैं हालांकि जंगल में उनके पृथक परिवेशों को अपनाये जाने के कारण से मौके के ही मिलते हैं 
किन्तु बन्द अवस्था में यह बात लागू नहीं होती है 
क्योंकि अफ्रीकी हाथ को हाल ही में को अलग जातियों का दर्जा मिला है ऐसा संभव है की बन्द हालत के अफ्रीकी हाथ संकट हैं 

को ने प्रजातियों के वर्गीकरण के अंतर्गत लॉक्सोडॉण्टा ऍफ़्रिकाना केवल अफ्रीकी खुश हाथ या रवाना हाथ को इंगित करता है जो भी प्राणियों में सबसे विशाल है 
और कंधे तक की से की तक का होता है और वजन में की से सूचित की तक का हो सकता है 
माना थोडी छोटी होती है और कंधे तक करीब की तक ऊंची होती है 
अमूमन रवाना हाथ पास के खुले मैदानों दलदल और झील के किनारे पाये जाते हैं 
यह रवाना के पूरे क्षेत्र में पाया जाता है जो की सहारा के दक्षिण में है 
दूसरी तथाकथित जाती अफ्रीकी जंगली जंगल का हाथ लॉक्सोडॉण्टा साइक्लॉटिस रवाना हाथ से आमतौर पर छोटा और गीला होता है तथा उसके हाथीदांत पहले और के घुमावदार होते हैं 
जंगल के हाथ का वजन की तक और कंधे तक की ऊंचाई करीब की हो सकते हैं 
अपने रवाना संबन्धियों की तुलना में इनके बारे में बहुत के जानकारी है क्योंकि पर्यावरण और राजनीतिक कारणों से इसमें बाधा आती है 
प्रायः यह मध्य और पश्चिमी अफ्रीका के ने वर्षावनों में रहते हैं लेकिन की की वनों की सीमाओं में भी विचरण करते हैं जिससे उनका आवासीय क्षेत्र रवाना हाथ के क्षेत्र से मिल जाता है जिससे संस्करण हो सकता है 
सन् कोई में यह अनुमान लगाया गया की अफ्रीकी हाथियों की आबादी लाख की है 
यह अनुमान विवादास्पद है और यह मानना है की यह अध्यागणन है लेकिन इसी तथ्य का व्यापक रूप से उल्लेख किया जाता है और अब यह वसुसतुतः आंकलन का आधार बन गया है जिसको गलत ढंग से दिखाकर जाती का निरंतर पता परिमाणित किया जाता है 
सन् के दशक में अज्फ़्रीकी हाथियों कोअथी ने पूरे विश्व का ध्यान अपनी और आकर्षित किया क्योंकि अवैध शिकार के कारण पूर्व अफ्रीका में इनकी आबादी निरंतर घटती चली गई 
आई यह की एक की सन् कोई की रिपोर्ट के मुताबिक जंगली परिवेश में लगभग से के बीच में अफ्रीकी हाथ हैं 
हालांकि यह आंकडा भी हाथियों के कुछ आवासीय क्षेत्र का लगभग आधा हिस्सा ही समाविष्ट करता है विशेषज्ञ यह मानते हैं की असली आंकडा इससे अधिक नहीं होगा क्योंकि इसकी संभावना के है की इसके अलावा हाथियों की कोई बडी आबादी खोज जायेगी 
आजकल इनकी सबसे ज्यादा आबादी दक्षिण तथा पूर्व अफ्रीका में पास जाती है जो कुछ मिलाकर महाद्वीप की अधिकांश आबादी है 
आई यह की एक के विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण तथा पूर्व अफ्रीका की बडी आबादी स्थित है और के दशक के मध्य से प्रति वर्ष औसतन न की और से बढती भी जा रही है 

दूसरी तरफ पश्चिमी अफ्रीका में हाथ की आबादी छोटी तथा बेटी हुयी है और महाद्वीप के बहुत छोटे अनुपात को दर्शाती है 
मध्य अफ्रीका की आबादी के बारे में बहुत अनिश्चितता बनी हुयी है जहां जंगलों के कारण आबादी का सर्वेक्षण करना कठिन कार्य है परन्तु यह ज्ञात है की वहां हाथीदांत के अवैध शिकार तथा हाथ के मांग के लिए उनका धडल्ले से शिकार किया जा रहा है 
दक्षिण अफ्रीका में हाथ की आबादी दुगुने से ज्यादा हो गयी है और यह संख्या सन् में हाथीदांत के व्यापार में पाबन्दी लगाने के बाद से बढकर से अधिक हो गई है दक्षिण अफ्रीका अन्य जगह नहीं में यह पाबन्दी फरवरी को हटा की गई जो पर्यावरण गुटों में विवाद का विषय बन गया है 


एशियाई हाथ ऍलिफ़स मैक्सिस अफ्रीकी हाथ से छोटा होता है 
इसके का छोटे होते हैं और अधिकांश रूप से केवल और में हाथीदांत पाये जाते हैं 

दुनिया और में एशियाई हाथ की जिन्हें भारतीय हाथ भी कहा जाता है आबादी आपकी गई है जो अफ्रीकी हाथ का दसवां भाग है 
अधिक सटीक यह अनुमान लगाया गया है की एशिया में जंगली हाथ करीब से हैं तथा फालतू हाथ से लेकर हैं और तकरीबन हाथ दुनिया और के चिडियाघरों में हैं 
एशियाई हाथ की आबादी का पता अफ्रीकी हाथ की तुलना में धीरे हुआ है और इसके प्रमुख कारण हैं अवैध शिकार तथा मनुष्यों द्वारा उनके क्षेत्रों को हड़प जाना 

जयपुर भारत में एक सुसज्जित हाथ 
श्री लंका में हाथियों का अनाथाश्रम 
एशियाई हाथ की के उपजातियां मौर्फ़ोमीट्रिक तथा मॉलिक्यूलर डाटा प्रणालियों द्वारा पहचान गई हैं 
ऍलिफ़स मैक्सिस मैक्सिस श्री लंका हाथ केवल श्री लंका के द्वीप में पाया जाता है 
वह एशियाई हाथियों में सबसे बडा है 
एक अनुमान के मुताबिक इनकी जंगलों में संख्या से तक आपकी गई है हालांकि हाल में कोई सर्वेक्षण नहीं हुआ है 
बडे और हाथ की के लगभग वजनी होते हैं तथा कंधे तक की तक ऊंचे होते हैं 
घरों के माथे पर बहुत बडे उभार होते हैं और दोनों लिंगों में अन्य एशियाई हाथियों की तुलना में रंजकता क्षीण होती है 
विशेषतः इनके सूंड का मुंह तथा पेट में हल्के गुलाबी रंग के चित्त पडे होते हैं 
पिन्नावाला श्री लंका में हाथियों का अनाथाश्रम है जो इनको विलुप्त होने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है 

एशियाई हाथ की आबादी का बडा हिस्सा बनाता है 
करीब की आबादी वाले के हाथ हल्के स्लेटी रंग के होते हैं तथा इनके केवल कानों और सूंड में रंजकता क्षीण होती है 
बडे और अमूमन की वजनी होते हैं लेकिन श्री लंका हाथ जीतने ऊंचे होते हैं 
मुख्य भी भाग्य हाथ भारत से लेकर इंडोनेशिया तक एशियाई देशों में पाया जाता है 
इनको जंगली इलाके परिवर्तन अंचल जो की जंगलों और पास के मैदानों के बीच होते हैं पसन्द हैं क्योंकि वहां इनको भोजन में अधिक विविधता मिल जाती है 

ऍलिफ़स मैक्सिस सुमात्रेनस या सुमात्रा का हाथ केवल सुमात्रा ही में पाया जाता है 
यह भारतीय हाथ से छोटा होता है 
इनकी संख्या से के बीच आपकी गई है 
यह भारतीय हाथ से भी हल्के रंग का होता है और इसकी रंजकता अन्य एशियाई हाथियों की तुलना में के क्षीण होती है तथा सिर्फ कानों पर गुलाबी धब्बे होते हैं 
वयस्क सुमात्रा हाथ अमूमन कंधे तक केवल से की ऊंचा होता है तथा वजन में की से के होता है 
यह अपने एशियाई तथा अफ्रीकी रिश्तेदारों से काफी छोटा होता है और केवल सुमात्रा द्वीप के उन क्षेत्रों में पाया जाता है जहां या तो जंगल हैं या पेडों की झुरमुट हो 

जिस कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में और हाथ 
सन् कोई में बोरनियो द्वीप में एक अन्य उपजाति पहचान गई है 
इसके बोरनियो पिग्गी हाथ के नाम से नवाजा गया है और अन्य एशियाई हाथियों की तुलना में यह ज्यादा छोटा और के आक्रामक होता है 
इसके अपेक्षाकृत बडे का और पूंछ होते हैं और इसके हाथीदांत भी अधिक सीधे होते हैं 

हाथ अपनी सूंड या तो चेतावनी देने के लिए या फिर मित्र अथवा शत्रु सूंघने के लिए उठाता है 

हाथ अपनी सूंड का इस्तेमाल के कार्यों के लिए करता है 

सूंड हाथ की नाम और उसके ऊपर हों की संधि है और लंबी हो जाने के कारण यह हाथ का सबसे महत्वपूर्ण तथा कार्यकुशल अलग बन गया है 
अफ्रीकी हाथियों की सूंड के चोर में को अंगुलिनुमा उभार होते हैं जबकि एशियाई हाथियों में केवल एक ही उभार होता है 
एक तरफ तो हाथ की सूंड इतनी संवेदनशील होती है की पास का एक जिनका भी उठा लेती है तो दूसरी तरफ इतनी मजबूत भी होती है की पेड की टहनियां भी उखाड के 

अधिकांश शाकाहारी पशुओं के दांतों की संरचना इस प्रकार की होती है की वह पौधे के विभिन्न भागों को का फाड सकें 
जबकि हाथियों में बीमार और बहुत छोटे बच्चों के अलावा हाथ पहले अपनी सूंड से खाना फाड़ता है और फिर उस निकाले को अपने मुंह में पहुंचाता है 
वह सूंड के द्वारा पास करता है या फिर पर पेड से पत्तियां पल या सूची शाखायें तोड लेता है 
अगर पेड में भोजन उसकी सूंड की पहुंच से भी पर है तो हाथ अपनी सूंड पेड के ने या शाखा में लपेटकर जोर से झिंझोडता है ताकि पल इत्यादि नीचे टपक जाये या की की पूरे का पूरा पेड ही उखाड देता है 

हाथ सूंड का इस्तेमाल पानी पीने के लिए भी करता है 
नहाने के लिए भी हाथ इसी विधि का इस्तेमाल करता है 
नहाने के बाद अपने गले शरीर में हाथ सूंड से मिट्टी छिडक लेता है जो सूखकर उसकी त्वचा के पर पपड़ी का रूप के लेती है और उसकी तेज रूप तथा परजीवियों से सुरक्षा करती है 
अन्य स्तनपाइयों की तरह न सिवाय इन्सान और वनमानुष के जिन्हें सीखना पडता है न हाथ भी बहुत अच्छा तैराक होता है 
तैरते समय हाथ अपनी सूंड का इस्तेमाल स्नॉरकॅल की तरह करता है 


सूंड हाथ के सामाजिक कार्यकलापों के पर भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है 
संबन्धी अपनी सूंडों एक दूसरे से लपेटकर अभिवादन करेंगे जैसा मनुष्य हाथ मिलाकर करते हैं 
इसका इस्तेमाल वह खेल करते हुए कुश्ती में मिल से पहले मां तथा बच्चे के सम्बन्ध में तथा अन्य कार्यकलापों में भी करते हैं 
उसी हुयी सूंड चेतावनी या धमकी हो सकती है जबकि फिर नीचे करके चुकी हुयी सूंड समर्पण का संकेत हो सकती है 
दुश्मन को हाथ अपनी सूंड से लपेटकर फेंक सकता है 

हाथ की सूंड में मनुष्य से के गुना अधिक प्राण शक्ति होती है और वह अपनी सूंड पर उठाकर तथा दाहिने बातें समुद्री दूरबीन पॅरिस्कोप की तरह हराकर अपने खाद्य स्रोत मित्र तथा शत्रु का पता लगा लेता है 

हाथ के हाथीदांत उसके दूसरी ऊपर छेद दांत होते हैं 
हाथीदांत हाथ के जीवनकाल में निरन्तर बढते रहते हैं 
एक वयस्क और के हाथीदांत लगभग एक वर्ष में से की की और से बढते रहते हैं 
हाथीदांत पानी लव तथा मूल खोलने के का आते हैं 
इसके अलावा पेडों की साल छीनने और अपने लिए रास्ता तैयार करने में भी हाथीदांत का बडा योगदान होता है 
इसके अलावा हाथीदांत अपनी परिधि जाने के लिए पेडों में निशानदेही के लिए तथा की कार अस्त्र शस्त्र के लिए भी इस्तेमाल में लिए जाते हैं 

जैसे मनुष्य दायां या बायां हाथ का इस्तेमाल करने वाला होता है उसी प्रकार हाथ भी आमतौर पर दायां या बायां हाथीदांत इस्तेमाल करता है 
मुख्य हाथीदांत अमूमन थोडा छोटा होता है और उसके चोर कुछ गोल होते हैं क्योंकि उस हाथीदांत का ज्यादा इस्तेमाल हुआ होता है 
और और माना अफ्रीकी हाथ के लम्बे हाथीदांत होते हैं जो वयस्क अवस्था में की तक लम्बे और की तक वजनी हो सकते हैं 
एशियाई हाथियों में सिर्फ और के लम्बे हाथीदांत होते हैं 
माना के बहुत छोटे या अमूमन नहीं होते हैं 

एशियाई और के अफ्रीकी और जीतने लम्बे हाथीदांत हो सकते हैं लेकिन वह बहुत पहले और हल्के होते हैं 
आज तक सबसे वजनी की का आपका गया है 
हाथीदांत में नक्काशी सफलतापूर्वक हो जाती है अतः कलाकारों ने से महत्ता की जिसके कारण भारी सन्ख्या में विश्व में हाथियों का विनाश हुआ 

अन्य स्तनपाइयों के विपरीत जिनके दूध के दांत झडने के बाद स्थान दांत आ जाते हैं हाथ के दांत निरन्तर बदली होते रहते हैं 
लगभग एक वर्ष की आया में हाथीदांत के अग्रगामी दूध के दांत झड जाते हैं और हाथीदांत उसने लग जाते हैं 
किन्तु बचाने वाले दांत अग्रचर्वणक तथा चर्वण एक हाथ की आया में करीब पांच बार या बहुत विरले ही छह बारबदली होते हैं 

एक बार में केवल चार बचाने वाले दांत अग्रचर्वणक तथा अथवा चर्वण एक एक दोनों जबड़ों के दोनों तरफ प्रयोग में लिये जाते हैं 
या केवल को क्योंकि जबड़े के है हिस्से में दूसरा दांत पहले को बदली कर रहा होता है 
मानव दांतों के विपरीत पक्के दांत दूध के दांतों को पर की तरफ से नहीं धकेलते हैं 
वरना ने दांत मुख के पिछले भाग में लगते हैं तथा पुराने दांतों को आगे की तरफ धकेलते हैं जहां पुराने दांत टूट टूट कर फिर जाते हैं 
अफ्रीकी हाथियों में जन्म से ही बचाने वाले दांतों का पहला समूह सेट अग्रचर्वणक मौजूद होता है 
जब शासक को वर्ष का होता है तो दोनों जबड़ों के दोनों तरफ का पहला बचाने वाला दांत फिर जाता है 
ही प्रक्रिया दूसरे बचाने वाले दांतों के समूह के साथ छह वर्ष की आया में होती है 
से वर्ष की आया तक तीसरा दांतों का समूह भी जाता रहता है तथा चौथा समूह वर्ष की आया में झड जाता है 
पांचवा समूह हाथ की वर्ष की आया तक चलता है 
कदाचित उठा समूह हाथ के जीवन के अन्य तक चलता है 
यदि हाथ वर्ष की आया से अधिक जीवित यह जाता है तो चर्वण का आखिरी समूह भी जिस जिस कर ठूंठ और यह जाता है तथा हाथ भी भांति का भी नहीं सकता है 

हाथियों को बोलचाल की भाषा में हाथ अपने मूल वैज्ञानिक वर्गीकरण से कहा जाता है जिसका अर्थ मोटी चमडी के जानवरों से है 
इसके शरीर का अधिकांश भाग अत्यंत कठोर होता है 
हालांकि मुंह और का के भीतर के चारों और त्वचा काफी पहली होती है 
आम तौर पर एक एशियाई हाथ की त्वचा में अपने अफ्रीकी रिश्तेदार से अधिक बाद होते हैं 
युवा हाथ में यह फर्क अधिक नजर आता है 
एशियाई शासकों की त्वचा अमूमन कत्तई रंग के बालों से की रहती है 
उम्र के साथ बाद गाढे रंग के होने के साथ साथ के होने लगते हैं लेकिन उसके फिर और पूंछ में वह सदा रहते हैं 
हाथ क्यों तो स्लेटी रंग के होते हैं लेकिन अफ्रीकी हाथ अलग अलग रंग की मिट्टी में लौटकर लाल या पूरे रंग के प्रतीत होते हैं 
गोली मिट्टी में लौटना हाथ समाज की दिनचर्या का एक अभिन्न अलग होता है 
न केवल लौटना सामाजीकरण के लिए हम है बल्कि मिट्टी धूपरोधक का का भी करती है और उसकी त्वचा को पराबैंगनी किरणों से बताती है 
हाथ की त्वचा कठोर होने के बावजूद संवेदनशील होती है 
यदि वह नियमित रूप से मिट्टी का स्नान न के तो उसकी त्वचा को जाने से कीटदंश से और नही निकल जाने से काफी नुकसान हो सकता है 
मिट्टी में लौटने से त्वचा को हाथ के शरीर का तापमान नियंत्रित करने में मदद मिलती है 
हाथ को अपनी त्वचा से शरीर की गर्मी निकालने में मुश्किल होती है क्योंकि शरीर के अनुपात में त्वचा बहुत के होती है 
हाथ के वजन और उसकी त्वचा के सही क्षेत्रफल का अनुपात मनुष्य की तुलना में बहुत अधिक होता है 
हाथियों को अपनी मांग उठाकर पर के भालुओं को हवा देकर संभवतः ठण्डा रखने की कोशिश करते देखा गया है 

हाथ के पैरों की बनावट मोटे स्तंभों या खंभों के समान होती है 
हाथ को अपनी सीधी मांगों और बडे गद्देदार पैरों की वजह से खडे रहने में मांसपेशियों से के शक्ति की आवश्यकता होती है 
इसी कारण हाथ बिना के बहुत लंबे समय तक खडे यह सकते हैं 
वास्तव में अफ्रीकी हाथियों को शायद ही की लेने हुए देखा जाता हो सामान्य के बीमार या घायल होने पर ही लेते है 
इसके विपरीत एशियाई हाथ अक्सर लेना पसन्द करते हैं 
हाथ के पर लगभग गोल होते हैं 
अफ्रीकी हाथियों के प्रत्येक पिछले पर पर तीन नाखून और प्रत्येक सामने के पर पर चार नाखून होते हैं 
भारतीय हाथियों के प्रत्येक पिछले पर पर चार नाखून और प्रत्येक सामने के पर पर पांच नाखून होते हैं 
पर की हड्डियों के नीचे एक कडा श्लेष पदार्थ होता है जो एक गद्दे या शंकर के रूप में कार्य करता है 
हाथ के वजन से पर फूल जाता है लेकिन वजन है जाने से यह पहले जैसा हो जाता है 
इसी कारण से गोली मिट्टी में गहरा धंस जाने के बावजूद हाथ अपनी मांगों को आसानी से बाहर खींच लेता है 



शंका से आपका आध्यात्मिक विकास सीमा नहीं होता बल्कि इससे तेजी ही आती है 
बच्चे शंकालु व्यक्ति ही बच्चे आध्यात्मिक बनते हैं क्योंकि के किसी बात पर आँख बंद कर विश्वास नहीं कर लेते बात की तो में जाने की कोशिश करते हैं 

शंका करना कोई बुरी बात नहीं है 
आपको समझना होगा की शंका का अर्थ क्या है 
शंकालु होने का मतलब किसी चीज के बारे में पक्की जानकारी न होने की वजह से उस पर विश्वास नहीं करना 
पर यह विश्वास जब है चीज के बारे में हमेशा ने रहने वाले एक में बदल जाता है तो वह एक लोग बन जाता है 
विश्वास का मतलब है की आप पहले ही किसी नतीजे पर पहुंच चुके हैं 
लेकिन शंकालु होने का मतलब है की आप भी भी खोज बीच कर रहे हैं 
आप भी भी परतें खोल कर उनको अच्छी तरह देखना चाहते हैं 
तो शंका से आपका आध्यात्मिक विकास सीमा नहीं होता इससे इसमें तेजी ही आती है 
से कहें तो केवल बच्चे शंकालु लोग ही आध्यात्मिक बन पाते हैं क्योंकि के कुछ खोज रहे होते हैं 
बाकी लोग तो है चीज के लिए पहले ही बेवकूफी भरे नतीजों पर पहुंच चुके हैं अविश्वास लोग नकारात्मक नतीजों पर और विश्वास सकारात्मक नतीजों पर 
लेकिन दोनों एक जैसे ही हैं 
थोडा इधर या थोडा उधर क्या फर्क पडता है के से एक ही खेल खेल रहे हैं आंकडों का खेल 

जब आप मौत के सामने खडे होंगे तो सारे नतीजे धीरे के धीरे यह जायेंगे 
मुझे मालूम है की लोग इस जिंदगी को मौत के पर तक खींचने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन तब के कुछ नहीं कर पाएंगे जब सामने मौत खडी होगी 

शंकालु इंसान जोडने घटाने को तैयार नहीं होता जो जैसा है वह से वैसा ही देखना चाहता है 
यह एक आध्यात्मिक तरीका है 
आध्यात्मिक तरीका का मतलब है जिंदगी को ठीक उसी रूप में देखना जैसी की वह है 
उसमें कुछ जोडना घटना नहीं है उसके उसके असली रूप में देखना है 
एक शंकालु आदमी की सोच ठीक ऐसी ही होती है 
मेरे विचार से आध्यात्मिक प्रक्रिया के लिए यह एक आदर्श सोच है की किसी चीज को बढा चढा कर या फिर के कर के देखने की जरूरत नहीं 
लेकिन है चीज को के कर आपकी अपनी शंकाएं हैं 
अगर आप शंका नहीं करेंगे तो जांच पडताल नहीं करेंगे 
जांच पडताल या खोज बीच साधना के लिए रखा से शब्द हैं 

पर साधक एक प्रकार से खोज ही होता है 
बात इस इतनी है की एक सच्चा खोज से जाने के लिए साधना करता है 
अगर आप कहते हैं की किसी की जांच हो रही है या आप किसी की जांच कर रहे हैं तो इसका मतलब है की आप किसी मामले का से जाने की कोशिश कर रहे हैं 
इसके जांच पडताल कहते हैं और ही साधना भी है 
आध्यात्मिक साधना भी एक जांच पडताल है किसी एक इंसान की नहीं बल्कि अस्तित्व की 
है पूरे अस्तित्व की जांच पडताल कर रहे हैं 
ही है आध्यात्मिक साधना 

यदि आप शंकालु नहीं हैं तो की जांच पडताल नहीं कर पायेंगे आप सीधे नतीजे पर पहुंच जायेंगे 
जब आप मौत के सामने खडे होंगे तो सारे नतीजे धीरे के धीरे यह जायेंगे 
मुझे मालूम है की लोग इस जिंदगी को मौत के पर तक खींचने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन तब के कुछ नहीं कर पाएंगे जब सामने मौत खडी होगी 
जब आपको के समझ आ जाएगा की आपके अस्तित्व की प्रकृति ही है एक दिन मिल जाना तो आपकी जिंदगी के सारे नतीजे गायब हो जायेंगे और तब आप जिंदगी की जांच पडताल या कहें की सत्य की साधना में जुट जायेंगे 
दोनों एक ही बात है 
इस इतना ही खयाल रखना होगा की शंका के रास्ते नहीं आप निराशा की तरफ का बढ जाएं अपनी जिंदगी से किनारा न कर में 
यदि आप एक हताश निराश शंकालु किस्म के इंसान हैं तो किसी दिमाग डॉक्टर की जरूरत है आपको 
अगर आपके मन में खुशी और शंका दोनों साथ हैं तो फिर आप एक बहुत अच्छे आध्यात्मिक साधक हैं और सत्य की साधना के लिए यह एक आदर्श मानसिक दशा है 




देश आप सारी प्रजा का नियमन करने वाले हैं 
अतः आपका यह नाम पड़ा 
है श्रेष्ठ मैंने यह भी सुना है की मन वचन और क्रिया द्वारा किसी भी प्राणी का प्रतिद्रोह न कर के से पर समान रूप से गया करना और दिन देना ही महापुरुषों का सनातन धर्म है 
हूँ तो संसार के भी पुरुष यथाशक्ति कोमलता का आश्रय ग्रहण करते हैं किन्तु महापुरुष तो महापुरुष होता है 
वह तो अपने पास आये शत्रु पर भी गया करता है 

कल्याण जैसे क्षुधित को अन्य मिले त्रिषित को जो मिले और फिर होगी को अमृत समान औषधि मिल जा वैसे ही तुम्हारे धर्मानुकूल वचनों को सुनकर मुझे खुशी खुशी सत्यवान के जीवन को छोड़कर कोई तीसरा जो भी और मांगो स्वीकार है 

देश आप धर्मराज हैं आप जाता हैं और में गया की यात्रा हूँ 
मेरे पिता अश्वपति को कोई पुत्र नहीं है उन्हें भी और पुत्र देने की कृपा करें 

मुझे बरबस कोई तुम्हारी हां में हां मिलने को प्रेरित कर रहा हूँ 
चलो यह भी के दिया 
है नारी रत्न मेरी बात मान को 
बहुत दूर आ गयी हो 
आगे का मार्ग किसी मानव के लिए असम्भव है 
अब तो लौट जा 

मेरी एक को बातें और सुन लीजिए 
एक तो में पति के समीप हूँ अतः दूरी का तो कोई नाम ही नहीं और न मुझे उसका अनुभव हो रहा है 
दूसरी बात आप विवस्वान सूर्य के पुत्र हैं और वैवष्वत्‌ कहलाते हैं 
से पर समान न्याय करने वाले होते हैं 
आप तो सज्जन शिरोमणि हैं आप कृपा के जिधर हैं करुणा के सागर हैं 
और क्या इसमें भी को राय है की संतों के साथ साथ कदम चल ही दिया जा तो मित्रता हो जाती है सता ही सप्तपदेशु मंत्री 
अतः आप मेरे पर सुहृद भी हुए 
आप सख्त हैं कृपालु हैं सुहृद हैं न्याय हैं धर्मराज हैं इसलिए आप पर विश्वास करके आप से कुछ करने का साहस करती हूँ 


देवी यह मेरी तीसरी पराजय है 
एक बार हमारा था ऋषि पुत्र मार्कण्डेय से और से अमरत्व का वरदान मिला 
दूसरी बार हमारा ऋषि पुत्र नचिकेता से वह मेरी यमपुरी से अमरत्व का ज्ञान लेकर चिरंजीवी हो लौटा 
और तीसरी बार हमारा नारी सावित्री से 
मेरे पास से तुमने अपने पति को प्रेम से चीन लिया है 
में हमारा हूँ लेकिन प्रसन्नता से खुद से नहीं 
नियम में बंधा हुआ आज नियम तो के रहा है 
वचनबद्ध यमराज तुम्हें तुम्हारा पति के रहा है 
जा सावित्री नाम को पतिव्रता की रेखा में सबसे ऊंची कर के 
आज की तिथि से तुम्हारे पति को चार से वर्षों की आया के रहा हूँ 
पुत्री पवित्र किया कुछ दो अपने पिता और अपने पति दोनों को साथ कर देने वाली सावित्री तुम्हारी जो हो 



बिना किसी से जुड़े या बंधे हुए और निडर होकर इच्छा को समझकर उससे मुक्त रहने 
इच्छा जो की भ्रमों की जननी है उससे मुक्त रहने में आजादी है 
अकेले रहने में ही असली और अनन्त शक्ति है 
ज्ञान से ठूंसा हुआ बंधनों में जुड़ा नियोजित दिमाग की भी अकेला नहीं होता 
जो धार्मिक या वैज्ञानिक या तकनीकी रूप से नियोजित हो वह सदैव सीमित होता है 
सीमितता ही द्वंद्व का मुख्य घटक है 
इच्छाओं में जुड़े आदमी के लिये सौन्दर्य एक खतरनाक चीज है 




पहले अंडा आया या मर्जी यह प्रश्न हजारों वर्षों से लोगों को परेशान करता आया है 
लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस पक्ष प्रश्न का जवाब ढूंढ निकालने का दावा किया है 
शेफील्ड और वारविक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के एक दल ने दावा किया है की धरती पर अंडे से पहले मुर्गी का जन्म हुआ था 
वैज्ञानिकों ने पाया की ओवोक्लाइडिन नाम का प्रोटीन अंडे के खोल के निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण होता है 
उन्होंने बताया की यह प्रोटीन मुर्गी के अंडाशय से पैदा होता है इसलिये पहले अंडा आया या मुर्गी अब यह पहली सुलझ गई है 
वैज्ञानिकों ने कहा की पहले मुर्गी आई और इसके बाद अंडा पैदा हुआ 
डेली एक्सप्रेस के मुताबिक रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है की प्रोटीन पैदा करने वाली मुर्गियां पहले कैसे आई 
इस दल ने अंडे के खोल को देखने के लिये अत्याधुनिक कंप्यूटर सेक्टर का इस्तेमाल किया 
शोध से जुडे प्रमुख वैज्ञानिक डॉक् कोलिन फ्रीडमैन ने कहा लम्बे समय से यह संदेह बना हुआ था की अंडा पहले आया लेकिन अब हमारे पास वैज्ञानिक सबूत है जो में बताया है की मुर्गी पहले आई 




मुजफ्फरपुर में केदारनाथ अग्रवाल जन्मशती समारोह सम्पन्न 

नागार्जुन केदार त्रिलोचन शमशेर और मुक्तिबोध हिन्दी में प्रगतिशील कार्य सृष्टि के पांच रत्न हैं 
प्रगतिशील साहित्य का आन्दोलन भक्ति आन्दोलन के समान महाप्रतापी सामान्य हुआ तो उसमें इन पांच रत्नों की ऐतिहासिक भूमिका है 
के वस्तुतः इतिहास निर्माता कि हैं 
इनकी चौथे दशक की कविताएं ही प्रगतिवाद की आधार सामग्री थीं 
इनमें केदारनाथ अग्रवाल रामविलास शर्मा के सका और कदाचित समकालीनों में सर्वाधिक प्रिय कि के 
केदार साम्राज्यवाद सामन्तवाद पूंजीवाद व्यक्तिवाद और संप्रदायवाद के शत्रु कि के 
गई को बिहार प्रगतिशील लेखक संबंध द्वारा मुजफ्फरपुर में आयोजित केदारनाथ अग्रवाल की कविता और उसका समय विषय परिचर्चा में आलेख पास करते हुए आलोचक रेवती रमन ने यह बात की 

इससे पहले का पूनम सिंह ने केदार के कार्य व्यक्तित्व में मानवीय संवेदना को रेखांकित करते हुए कहा की केदार की कविता कठिन जीवन संघर्षों के बीच अदम्य जिजीविषा बनाये रखने वाले स्त्रोतों की खोज करती है के मूलतः किसान संवेदना के कि हैं उनकी कविताएं उनके बांदा जनपद की संस्कृति से जुडी हुई है 
नागार्जुन के बांदा ने पर उन्होंने जो कविता लिखी उसमें उनके गांव का पूरा चित्र प्रतिबिम्बित है 
केदार का समस्त कविकर्म अभियोजन के दायरे से बाहर जाकर गरीब किसानों कामगार मजदूरों दलित स्त्रियों के पक्ष में खडा है 
केदार का कि सामंती वर्चस्व का अतिक्रमण कर मानव मूल्यों की वकालत करता है तथा मुक्तिबोध की तरह अभिव्यक्ति के खतरे उठाने को सदैव तत्पर है 


बिहार प्रेस के महासचिव राजेन्द्र राजा ने अपने संबोधन में कहा की केदारनाथ अग्रवाल प्रगतिशीलता के प्रतिमा हैं 
उनकी रचनाएं प्रतिबद्ध साहित्य का नमूना है 
के परिवर्तन को अवश्यंभावी मानते के भी तो उन्होंने लिखा भी एक हथौडे वाला और में और हुआ हाथ से बलवान जहाज हाथों वाला और हुआ दादा रहे बिहार सवेरा करने वाला और हुआ एक हथौडा वाला और में और हुआ 


बांदा से आये नरेन्द्र पुण्डरीक ने कहा की केदारनाथ अग्रवाल की कविता हमारे समाज की विडम्बनाओं एवं त्रासदियों से सीधे साक्षात्कार करते हुए जिस तरह से अपने परिवेश के उपादानों नदी पहाड खेत पेड आदि को एक नयी पहचान देकर उनके प्राकृतिक सौन्दर्य को अपने यहां के आदमी को विसंगतियों से उतारने एवं उसकी पहचान को बनाने एवं से सामने लाने का जो कार्य केदार की कविता ने किया है उसकी मिसाल प्रगतिशील हिन्दी कविता में दूसरी नहीं है 

का विजेन्द्रनारायण सिंह ने कहा की केदार की कविताओं में प्रगतिशीलता प्रयोगवाद और ने कविता का समन्वित प्रवाह है 
प्रो तरुण कुमार ने केदार को किसान संस्कृति और चेतना में हिन्दी का सर्वाधिक प्रतिबद्ध कि बताया 
पूर्व कुलपति का रिपुसूदन श्रीवास्तव ने कहा की प्रमाणिक मूल्यों एवं मानवीय संदर्भ के दृष्टिकोण से केदारनाथ अग्रवाल की कविता में रास्ता दिखाती है 
समारोह के उदघाटनकर्त्ता का व्रजकुमार पाण्डेय ने कहा की केदारनाथ अग्रवाल आजादी से लेकर साम्राज्यवाद से मुक्ति के लिए लड रही दुनिया के लिए कार्य रचनाएं की है 
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ आलोचक खगेन्द्र ठाकुर ने केदारनाथ अग्रवाल को ग्रामीण संवेदना के साथ ही क्रांतिकारी कि की संज्ञा की उन्होंने कहा की उनकी कविता में लडाकू मनुष्य दिखायी पडता है जो ने समाज के लिए लड रहा है 
इस सत्र का मंच संचालन कवियत्री एवं कथालेखिका पूनम सिंह ने एवं धन्यवाद ज्ञापन श्रवण कुमार ने किया 

आयोजन के दूसरे सत्र में कि सम्मेलन आयोजित हुआ 
जिसमें मुजफ्फरपुर सहित बिहार के विभिन्न हिस्सों से आये कवियों की भागीदारी रही 
नरेन्द्र पुण्डरीक बांदा शहंशाह आम अरविन्द श्रीवास्तवअरुण शीतांश अली अहमद मंजर श्रीमती मुकुल लाल अरविन्द ठाकुर नूतन आनंद देश आनंद का विषय चौधरी रश्मि रेखा आशा अरुण पुष्पा गुप्ता स्वाति सुनीता गुप्ता संजय पंकज मीनाक्षी मीन श्याम श्रीवास्तव श्रवण कुमार राजीव कुमार रानी श्रीवास्तव अंजना वर्मा आदि ने अपने कार्य पास से आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया 
इस सत्र का संचालन युवाकवि रमेश ऋतंभरा ने किया तथा अध्यक्षता प्रो रवीन्द्रनाथ राय ने की 
मुजफ्फरपुर में आयोजित इस आयोजन की धमकी काफी समय तक महसूस की जायेगी 




हवाला एरिया कानून का हिस्सा नहीं है 

हवाला शरीयत का कानून नहीं है बल्कि इस्लाम के खिलाफ है 
मैंने अपने ले में बताया था की इस्लाम के अनुसार तलाश क्या होती है और एक बार तलाश होने के बाद कोई भी महिला अपनी मर्जी से दूसरा विवाह करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होती है 
हां अगर किसी महिला की या उसके पति की उससे नहीं बनती और बदकिस्मती से फिर से तलाश की स्थिति आ जाती है 
तो ऐसी अवस्था में वह महिला अपनी इच्छा से फिर से पहले पति से शादी कर सकती है 


क्या हवाला एरिया कानून का हिस्सा है 

हवाला एरिया कानून का हिस्सा नहीं है बल्कि तलाक को इसलिए सख्त बनाया गया है की पुरुष महिलाओं पर ज्यादतियां करने की नीयत से इसका मजाक का बना में जब चाहे तलाश दिया और फिर जब चाहे दुबारा विवाह कर लिया 
इसीलिए तलाक के बाद वापस दुबारा शादी की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है 
यहां यह भी बताया चलूँ की इस्लाम में तलाक को सबसे ज्यादा नापसंदीदा का माना गया है और केवल विशेष परिस्थितियों के लिए ही इसका प्रावधान है 


एक बार तलाश होने के बाद कोई भी महिला अपनी मर्जी से दूसरा विवाह करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होती है 
हां अगर किसी तलाकशुदा महिला का अपने पति या उसके पति का उसके साथ तालमेल नहीं बैठता और बदकिस्मती से फिर से तलाश की स्थिति आ जाती है 
तो ऐसी अवस्था में वह महिला अपनी इच्छा से फिर से पहले पति से शादी कर सकती है 
अगर कोई जानबूझकर इस प्रक्रिया को दुबारा शादी के लिए इस्तेमाल करता है तो इस्लामिक कानून के मुताबिक उनके लिए बेहद सख्त सजाओं का प्रावधान है 
सन्दर्भ के लिए यह लिंक देखा जा सकता हैं 

निकाल की है एक सूरत में महिला और पुरुष दोनों की मर्जी आवश्यक है 
इस्लामिक विवाह की रहती में किसी भी स्थिति में बिना किसी महिला अथवा पुरुष की मर्जी के शादी हो ही नहीं सकती है 
अगर किसी महिला पुरुष से जबरदस्ती हां हलवाई जाती है और हस्ताक्षर करवाए जाते हैं तो इस सूरत में विवाह नहीं होता है 
और क्योंकि ऐसी स्थिति में क्योंकि विवाह वैध नहीं होता है इसलिए अलग होने के लिए तलाश की आवश्यकता भी नहीं होती है 
उपरोक्त संदर्भ से यह साथ हो जाता है की हवाला की इस्लाम में रत्ती और भी जगह नहीं है 


मैंने एक बार तलाश हो जाने पर दुबारा विवाह को लगभग नामुमकिन इसलिए कहा था क्योंकि किसी भी महिला की मर्जी के बिना पहली या दूसरी शादी हो ही नहीं सकती है और कोई भी महिला ऐसी घिनौनी हरकत को जानबूझकर क़ुबूल नहीं करेगी 
अगर किसी महिला या पुरुष का इस्लाम धर्म में विश्वास है तब तो वह ऐसा गुनाह बिलकुल भी नहीं करेंगे और अगर विश्वास ही नहीं है तो उन्हें ऐसा करने की आवश्यकता ही नहीं है वह देश के सामान्य कानून के मुताबिक कोर्ट में शादी कर सकते हैं 




न तो चिलचिलाती रूप की चिंता न ही पथरीले रास्ते बन का रहे रोडा 
में विंध्यवासिनी के दरबार में आस्था व उत्साह से लबरेज भक्तों का सैलाब 
कोई इलाहाबाद से तो कोई सुल्तानपुर से चला आया है 
यहां तक की दूसरे प्रांतों के लोगों को भी शक्तिदायिनी का प्रताप खींच लिया है 
रविवार को अवकाश का दिन होने के कारण भक्तों की संख्या पिछले को दिनों से नहीं ज्यादा थी 
उनमें भी पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं नहीं अधिक देखी गई 
घंटों कार में खडे रहने का किसी को कोई लाल नहीं 
इस लाल चुनरिया ओढने माया की मोह लेने वाली एक झलक पाने को है कोई बेताब 
नहीं महिलाओं का समूह में की जो जयकार कर रहा था तो नहीं लोग भजन कीर्तन में रहे के 
भी को में के चरणों में फिर झुकाने के लिए अपनी भारी ने का इंतजार था 
अनुमान लगाया गया की दिन और में तकरीबन पांच लाख लोगों ने में के चरणों में मत्था टेक पुण्य लाभ अर्जित किया 
उधर त्रिकोण करने वालों की संख्या भी आज अपेक्षाकृत ज्यादा थी 
मान्यता है की में विंध्यवासिनी देवी दर्शन के पश्चात यदि त्रिकोण पर विराजमान खाली देवी अष्टभुजा का दर्शन पैदल चलकर किया जाए तो है मनोकामना पूरी होती है 
बडी संख्या में श्रद्धालुओं ने खाली व अष्टभुजा का दर्शन कर त्रिकोण परिक्रमा पूरी की 




इलेक्ट्रॉनिक्स विज्ञान और प्रौद्योगिकी का है की शाखा है जो इलैक्ट्रॉनों की गति नियंत्रित के विभिन्न मीडिया और वैक्यूम के माध्यम से इस्तेमाल करता है 

इलेक्ट्रॉनिक प्रवाह को नियंत्रित करने की क्षमता आम तौर पर जानकारी हैंडलिंग या नियुक्ति नियंत्रण के लिए आवेदन किया है 

इलेक्ट्रॉनिक्स विद्युत विज्ञान और प्रौद्योगिकी है जो पीढी वितरण नियंत्रण और बिजली के आवेदन के साथ सौदे से अलग है 

तक इस क्षेत्र रेडियो प्रौद्योगिकी कहा जाता था क्योंकि उसके प्रमुख आवेदन डिजाइन और रेडियो 
ट्रांसमीटर रिसीवर और वैक्यूम ट्यूबों के सिद्धांत था 

सबसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों आज प्रयोग अर्धचालक घटकों इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण करने के लिए 

अर्धचालक युक्तियों और संबंधित प्रौद्योगिकी के अध्ययन भौतिकी की एक शाखा माना जाता है डिजाइन और 
इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का निर्माण जबकि व्यावहारिक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के अंतर्गत आते हैं 
समस्याओं का समाधान करने के लिए 

इस ले इलेक्ट्रॉनिक्स के इंजीनियरिंग पहलुओं पर केंद्रित है 



को वर्ष पूर्व तक स्वामी रामदेव की एक होगी के और अति आदरणीय जीवन व्यतीत कर रहे के 

आम आदमी से लेकर खास आदमी और नेता से लेकर अभिनेता तक उनके प्रशंसक और अनुयायी के 

अगर को चाहते तो इसी तरह जिंदगी गुजार सकते के 

जैसा की कुछ अभिनेताओं और नेताओं का कहना है की है किसी को अपना का करना चाहिए जो शायद के भूल गये हैं की अगर आज़ादी से पहले है इन्सान ही सोचता तो आज भी है गुलामी की जंजीरों में जकडे होते 

क्योंकि गांधी की शायद एक वकील सुभाष अंदर बस एक प्रोफेसर और चंदेर्शेखर आजाद किसी संस्कृत विधापीठ में पता रहे होते 

किन्तु देश को प्यार करने वाले खुद से ज्यादा देश की फिक्र करते हैं 

अपनी न बाद और शाम देश हित में रोक कर देते हैं 

ही स्वामी की ने भी किया 

आज की स्थिति भी कुछ कुछ वैसी ही है मीठी और भ्रष्ट और गद्दार नेता देश को सोच सोच कर का रहे हैं और है कोई अपना का कर रहा है 

को चाहते भी ही हैं की है कोई अपना का करें ताकि कोई उनके का में बाधा का ने और उनका का है देश को लूटना 

किन्तु जिसके दिल में भारत माता विराजमान हो को अपनी मां का इस तरह बलात्कार होते नहीं देख सकता 

इसी वेदना में स्वामी की ने देश को वापस देने की पानी जो सम्मान उन्हें इस देश से मिला था 
किन्तु उनसे कुछ गलतियां हुई जिनका जिक्र है अपने अगले ब्लॉग में करूंगा 

तब उन्होंने देश को भ्रष्टाचार के प्रति जागरूकता अभियान शुरू किया जहां उनके साथ लाखों लोग जुड़े चले गए 

उस वक्त हमारी मीडिया की और की और अपने आप को दूसरों से बेहतर बताने की होड में लगी थी 

इसीलिए किसी भी नेशनल चैनल पर उन्हें नहीं दिया गया 

उसके बाद स्वामी की ने फरवरी को विशाल रैली की जिसमें बडे बडे विचारों ने अपनी राय रही पर मीडिया के लिए के से कोई न्यूज नहीं थी 

अब में आपको आज़ादी से पहले के दौर में लेकर जाता हूँ तब कोई इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया नहीं था 

भारत में आज़ादी के लिए बिगुल जब चुका था 

महात्मा गांधी से लेकर सुभाष अंदर बस और अंदर शेखर आजाद से लेकर भगत सिंह तक है कोई अंग्रेजी के खिलाफ खड़ा था 

और भारत के आखिरी आदमी तक उनकी चर्चा थी 

उन भी के लाखों समर्थक के तो विरोधी भी के 

जिसका के जितना बडा था उसने ही ज्यादा उनके विरोधी भी के 

आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी चला 

किन्तु सबका ध्येय एक था 

आज़ादी और है आम इन्सान ही चाहता था फिर को चाहे गांधी के रास्ते से मिले या भगत सिंह के रास्ते चलकर मिले 

आज इतिहास में उनका नाम बडे सम्मान से लिया जाता है 

और को लाखों लोगों के हीरो हैं ही दूसरी और आरोप लगाने वालों को कोई नहीं जाता 

अब आज के दौर की बात करते हैं ध्येय सबका एक ही है रास्ता बेशक अलग हो चाहे को अन्ना हजारे हो या स्वामी रामदेव की 

किन्तु आज इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया ने जो भूमिका निभाई है को एक के मेरे में है की को इस अभियान को सफल बनाना चाहते हैं या रोकना चाहते हैं 

क्या के उनकी मजबूरी है की उन्हें घंटे न्यूज दिखाने के लिए कुछ गैर जिम्मेदार नेता से उनकी राय पूछने पड़ती है जो बेतुके आरोपों की जी लगा देता है 

जिसका कोई आधार नहीं होता और से ब्रेकिंग न्यूज बनाकर बार बार दिखाया जाता है 

ताकि आम लोग जो स्वामी की बारे में कुछ नहीं जानते को आरोपों के आधार पर अपनी राय काम कर सकें 

कुछ वरिष्ठ पत्रकारों से बातचीत करने पर उन्होंने भी माना की कुछ चैनल अपनी नैतिकता और फ़र्ज़ को भूलकर मुद्दे से आम इन्सान को हटाना चाहते हैं 

क्या के माना जाए की उन्हें चैनल के मालिकों की तरफ से कोई दिया निर्देश था या सरकारी दबाव में ऐसा कर रहे के 

कुछ चैनल तो स्वामी रामदेव को सिर्फ रामदेव से संबोधित कर रहे के 

हमारे भारत वर्ष की भाषा और संस्कर्ती ने में सैकंडो सम्मानजनक शब्द लिए हैं 

हमारे यहां किसी आम साधु को भी इस प्रकार संबोधित नहीं किया जाता 

मेरा मानना है की आज अगर इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया का होता तो के आन्दोलन ज्यादा सफल होता 

क्योंकि प्रिंटिंग मीडिया के जरिये है भारतीय को स्वामी की के ध्येय का पता चलता और आम जो उनसे जुड़ा चला जाता 

जहां आम जो में ही चर्चा होती की भारत का का धन विदेशों में कितना है और सरकार को से वापस लेकिन में क्या परेशानी है 

एक तरफ जहां स्वामी की अस्पताल में मौत से जूझ रहे के ही दूसरी और एक चैनल कुछ पाखंडी साधुओं के 
साथ जो नाम के लिए किसी भी है तक फिर जाते हैं स्वामी की के होगी होने पर ही सवाल खड़े कर रहे के 


जिन्होंने लोग का डंका भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में बताया है 

आज अगर किसी इन्सान से पूछा जाए की क्या को लोग के बारे में कैसे जाता है तो उसका जवाब स्वामी रामदेव होगा 

को उस व्यक्ति पर दो लगा कर खुद को ही छोटा दिया रहे के 

क्या चाँद की तरफ माह करके थूकने से चाँद मिला हो जाएगा के सवाल है उस होंगी की पूछा हूँ जिसे के भी नहीं पता की स्वामी की हंसते कैसे हैं 

उनकी दिनचर्या क्या है 

जिसे के भी नहीं पता की स्वामी की ने वर्षों से अन्य को त्याग रखा है फिर भी उन्होंने से बार प्रेस कांफ्रेंस की और है बेतुके सवाल का जवाब देने की कोशिश की 

इसी प्रकार किसी का किसी चैनल पर कोई का कोई नेता आरोप लगा रहा था 

और पत्रकार अपने नैतिक मूल्यों की दुहाई के रहा था 

सवाल के उठता है की अगर को निष्पक्ष राय देना ही चाहते हैं तो बहस के लिए दोनों पक्षों को क्यों नहीं बुलाते 

जिससे आम जाता को भी सोचने का मौका मिले 

एक व्यक्ति आरोप लगता है की स्वामी की के पास करोड़ों की सम्पति है तो उससे के प्रश्न पूछने वाला 
कोई नहीं होता की क्या करोड़ों रुपये की आयुर्वेदिक दवाओं का उत्पादन स्वामी की कमरे में बैठकर 
करें 

और के सम्पति स्वामी की की नहीं बल्कि एक ट्रस्ट की है जो के तरह से सेवाएं के रही है 

को इसका उपयोग अपने परिवार के लिए नहीं करते 

और अगर के गलत तरीके से कमाई गई होती तो रात को 
सकते हुए लोगों पर लाठियां बरसाने वाली सरकार उन्हें यहां तक पहुंचने देती 

से तो के है की को अपनी भी जांच 
एजेंसियों से उनकी जांच करना चुकी है किन्तु उन्हें माह की पानी पड़ी 



तब कुछ नेता लोकतंत्र की दुहाई देने लगे जिन्हें लोकतंत्र की परिभाषा तक नहीं मालूम और मीडिया 
के जरिये लोगों को बरगलाने की कोशिश करते दिखे 

उनका कहना था की है जाता के चुने हुए नेता हैं 

क्या इसका मतलब के हुआ की जनता ने उन्हें लूटने का अधिकार के दिया 

के वरिष्ठ नेताओं का कहना तो यहां तक था की स्वामी की को कोई हक नहीं की को वाले धन को 
लाने की मांग करें क्योंकि को खुद जनता के चुने हुए सांसद है तो उन्हें ही उस पर फैसला करने का है 
है 

है उस नेता को चैलेंज करता हूँ की को बिना किसी प्रलोभन के एक लाख तो दूर इस हजार व्यक्ति 
इकट्ठे करके दिया के 

जिस लोकतंत्र की को दुहाई देते हैं अब जा से समझ को 





आईआईटी संयुक्त प्रवेश बोर्ड जेएबी ने आज यहां एक महत्वपूर्ण बैठक में आईआईटी जेईई परीक्षा का पैटर्न एक और वर्ष समान बनाने रखने पर सहमति जताई सूत्रों ने कहा की बोर्ड ने पिछले साल लागू हुए को चरणों वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा के ने पैटर्न की विस्तृत समीक्षा की और यह पाया की इस प्रणाली के करीब आकलन के लिए इस पैटर्न को एक और वर्ष बनाये रखना चाहिए 

जेएबी में इस प्रमुख संस्थान के विभिन्न परिसरों के प्रमुख शामिल हैं यह बैठक से समय हुई है जब यह खबरें हैं की आईआईटी में प्रवेश के लिए योग्यता में कुछ बदलाव किया जा सकता है 


जेएबी की आईआईटी खडगपुर में सितंबर को फिर से बैठक होने की संभावना है जहां इस मुद्दे पर एक बार फिर चर्चा होगी इस बीच आईआईटी परिषद की बैठक तीन सितंबर को होने है 

माना जा रहा है की आज की बैठक में अगले साल की परीक्षा की तिथियों पर भी फैसला किया गया आईआईटी मुख्य परीक्षा यह अप्रैल तथा आईआईटी जेईई एडवांस परीक्षा गई को होने की संभावना है 




आईआईटी संयुक्त प्रवेश बोर्ड जेएबी ने आज यहां एक महत्वपूर्ण बैठक में आईआईटी जेईई परीक्षा का पैटर्न एक और वर्ष समान बनाने रखने पर सहमति जताई 

सूत्रों ने कहा की बोर्ड ने पिछले साल लागू हुए को चरणों वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा के ने पैटर्न की विस्तृत समीक्षा की और यह पाया की इस प्रणाली के करीब आकलन के लिए इस पैटर्न को एक और वर्ष बनाये रखना चाहिए 

जेएबी में इस प्रमुख संस्थान के विभिन्न परिसरों के प्रमुख शामिल हैं 

यह बैठक से समय हुई है जब यह खबरें हैं की आईआईटी में प्रवेश के लिए योग्यता में कुछ बदलाव किया जा सकता है 

जेएबी की आईआईटी खडगपुर में सितंबर को फिर से बैठक होने की संभावना है जहां इस मुद्दे पर एक बार फिर चर्चा होगी 

इस बीच आईआईटी परिषद की बैठक तीन सितंबर को होने है 

माना जा रहा है की आज की बैठक में अगले साल की परीक्षा की तिथियों पर भी फैसला किया गया 

आईआईटी मुख्य परीक्षा यह अप्रैल तथा आईआईटी जेईई एडवांस परीक्षा गई को होने की संभावना है 



को वर्ष पूर्व तक स्वामी रामदेव की एक होगी के और अति आदरणीय जीवन व्यतीत कर रहे के 

आम आदमी से लेकर खास आदमी और नेता से लेकर अभिनेता तक उनके प्रशंसक और अनुयायी के 

अगर को चाहते तो इसी तरह जिंदगी गुजार सकते के 

जैसा की कुछ अभिनेताओं और नेताओं का कहना है की है किसी को अपना का करना चाहिए जो शायद के भूल गये हैं की अगर आज़ादी से पहले है इन्सान ही सोचता तो आज भी है गुलामी की जंजीरों में जकडे होते 

क्योंकि गांधी की शायद एक वकील सुभाष अंदर बस एक प्रोफेसर और चंदेर्शेखर आजाद किसी संस्कृत विधापीठ में पता रहे होते 

किन्तु देश को प्यार करने वाले खुद से ज्यादा देश की फिक्र करते हैं 

अपनी न बाद और शाम देश हित में रोक कर देते हैं 

ही स्वामी की ने भी किया 

आज की स्थिति भी कुछ कुछ वैसी ही है मीठी और भ्रष्ट और गद्दार नेता देश को सोच सोच कर का रहे हैं और है कोई अपना का कर रहा है 

को चाहते भी ही हैं की है कोई अपना का करें ताकि कोई उनके का में बाधा का ने और उनका का है देश को लूटना 

किन्तु जिसके दिल में भारत माता विराजमान हो को अपनी मां का इस तरह बलात्कार होते नहीं देख सकता 

इसी वेदना में स्वामी की ने देश को वापस देने की पानी जो सम्मान उन्हें इस देश से मिला था 

किन्तु उनसे कुछ गलतियां हुई जिनका जिक्र है अपने अगले ब्लॉग में करूंगा 

तब उन्होंने देश को भ्रष्टाचार के प्रति जागरूकता अभियान शुरू किया जहां उनके साथ लाखों लोग जुड़े चले गए 

उस वक्त हमारी मीडिया की और की 

और अपने आप को दूसरों से बेहतर बताने की होड में लगी थी 

इसीलिए किसी भी नेशनल चैनल पर उन्हें नहीं दिया गया 

उसके बाद स्वामी की ने फरवरी को विशाल रैली की जिसमें बडे बडे विचारों ने अपनी राय रही पर मीडिया के लिए के से कोई न्यूज नहीं थी 



रात शब्द संस्कृत की धातु रंग से बना है 
रंजन का अर्थ है रंगना 
जिस तरह एक चित्रकार तस्वीर में रंग भरकर से सुंदर बनाता है उसी तरह संगीतज्ञ मन और शरीर को संगीत के सुरों से रंगत ही तो हैं 
रंग में रंग जाना मुहावरे का अर्थ ही है की से कुछ बुलाकर मन हो जाना या तीन हो जाना 
संगीत का भी ही असर होता है 
जो रचना मनुष्य के मन को आनंद के रंग से रंग के ही रात कहलाती है 
है रात का अपना एक रूप एक व्यक्तित्व होता है जो उसमें लगने वाले स्वरों और ले पर निर्भर करता है 
किसी रात की जाती इस बात से निर्धारित होती हैं की उसमें कितने स्वर हैं 
आरोप का अर्थ है चुना और अवरोह का उतरना 
संगीत में स्वरों को क्रम उनकी ऊंचाई निभाई के आधार पर तो किया गया है 
इसी को आरोप कहते हैं 
इसके विपरीत पर से नीचे ने को अवरोह कहते हैं 
आरोप अवरोह में बातों स्वर होने पर रात सम्पूर्ण जाती का कहलाता है 
पांच स्वर लगने पर रात औडव और यह स्वर लगने पर षाडव रात कहलाता है 
यदि आरोप में साथ और अवरोह में पांच स्वर हैं तो रात सम्पूर्ण औडव कहलाएगा 
इस तरह कुछ जातियां तैयार हो सकती हैं जिन्हें रात की उपजातियां भी कहते हैं 
साधारण गणित के हिसाब से देखें तो एक था के साथ स्वरों में रात तैयार हो सकते हैं 
लेकिन कुछ मिलाकर कोई डे़ढ़ से रात ही प्रचलित हैं 
मामला बहुत पेचीदा लगता है लेकिन यह केवल साधारण गणित की बात है 
आरोप में और अवरोह में भी स्वर होने पर सम्पूर्ण सम्पूर्ण जाती बनती है जिससे केवल एक ही रात बन सकता है 
नहीं आरोप में और अवरोध में स्वर होने पर सम्पूर्ण षाडव जाती बनती है 


