अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में यह शर्त रखी कि इस धन का इस्तेमाल केवल उन लोगों को पुरस्कारों देने के लिए किया जायेगा, जिन्होनें भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान , शांति, शरीर विज्ञान या दवाई और साहित्य के क्षेत्र में मानवजाती की सेवा में उत्तमकार्य किया हो.[6][7] यद्यपि नोबेल ने अपने जीवन काल में बहुत सी वसीयतें लिखीं थी परंतु उनकी अंतिम वसीयत उनकी मृत्यु से लगभग एक वर्ष पहले लिखी गई, और 27 नवंबर 1895 को पेरिस के स्वीडिश नोर्वेवेगियन क्लब में हस्ताक्षरित की गई.[8][9] इस वसीयत में नोबेल ने अपनी कुल संपत्ति का 94%, 31 मीलियन स्वीडिश क्रोनर (2008 में 186 मिलियन अमेरिकी डॉलर) पांच नोबेल पुरस्कार स्थापित करने और प्रदान करने के लिए रखा.[10] वसीयत पर संदेह होने के कारण कुछ दिन तक यह संभव नहीं हो पाया लेकिन 26 अप्रैल 1897 को स्टोर्टिंग (नोर्वे की संसद) ने इसे मंजूरी दे दी.[11][12] उनकी वसीयत के निर्वाहक रेगनर सोलमैन और रूडोल्फ लिलजेक्विस्ट थे, जिन्होंने नोबेल की विपुल संपत्ति की देखभाल करने के लिए नोबेल फाउंडेशन की स्थापना की और पुरस्कारों को व्यवस्थित किया.

नार्वेगियन नोबेल समिति जो शांति पुरस्कार प्रदान करने के लिए थी, उसकी नियुक्ती वसीयत के अनुमोदन के तुरंत बाद ही कर दी गई थी. बाद में निम्नलिखित पुरस्कार प्रदान करने वाले संगठन बनें: 7 जून को कारोलिनास्का संस्थान, 9 जून को स्वीडिश अकादमी, और 11 जून को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज.[13][14] इसके बाद नोबेल फाउंडेशन ने दिशा निर्देश पर एक समझौता किया जो इस लिए था कि नोबेल पुरस्कार किस प्रकार प्रदान किए जाने चाहिएं. 1900 में, नोबेल फाउंडेशन के नव निर्मित क़ानून को राजा ऑस्कर द्वितीय द्वारा लागू किया गया.[12][15][16] नोबेल की वसीयत के अनुसार, रॉयल स्वीडिश अकादमी को साहित्य के क्षेत्र में पुरस्कार प्रदान करना था.[16]
