आई आई टी सं युक्त प्रवेश बोर्ड जे ए बी ने आज यहां एक महत्व पूर्ण बैठक में आई आई टी जेईई पर ी क्ष ा का पैटर्न एक और वर्ष समान बना ने रख ने पर सहमति जताई 
 सूत्र ों ने कहा कि बोर्ड ने पिछले साल लागू हुए दो चरणों वाली सं युक्त प्रवेश पर ी क्ष ा के न ये पैटर्न की वि स्त ृ तस मी क्ष ा की और यह पा या कि इस प्रण ा ली के करीबी आ कल न के लिए इस पैटर्न को एक और वर्ष बना ये रखना चाहिए 
 जे ए बी में इस प्रमुख संस्था न के वि भिन्न परिसर ों के प्रमुख शामिल हैं 
 यह बैठक ऐसे समय हुई है जब यह खबरें हैं कि आई आई टी में प्रवेश के लिए योग्य ता में कुछ बदलाव कि या जा सकता है 
 जे ए बी की आई आई टी खड़ग पुर में 15 सितंबर को फिर से बैठक हो ने की सं भाव ना है जहां इस मुद्दे पर एक बार फिर चर्चा होगी 
 इस बीच आई आई टी परिषद की बैठक तीन सितंबर को होनी है 
 माना जा रहा है कि आज की बैठक में अगले साल की पर ी क्ष ा की तिथि यों पर भी फैसला कि या गया 
 आई आई टी मुख्य पर ी क्ष ा छह अप्रैल तथा आई आई टी जेईई एडवांस पर ी क्ष ा 25 मई को हो ने की सं भाव ना है 
 दो वर्ष पूर्व तक स्वामी राम दे व जी एक योगी थे और अति आ दर न ी य जी व न व्यतीत कर रहे थे 
 आम आदमी से ले कर खास आदमी और नेता से ले कर अभि नेता तक उन के प्र शं शक और अनु या यी थे 
 अगर वो चाहते तो इसी तरह जिंदगी गुजार सकते थे 
 जैसा की कुछ अभि नेताओं और नेताओं का कहना है की हर कि सी को अपना काम कर ना चाहिए जो शायद ये भूल गये हैं कि अगर आज़ादी से पहले हर इन्सान यही सोचता तो आज भी हम गुलामी की जंजीर ों में जकड़े होते 
 क्यों कि गाँधी जी शायद एक व की ल सुबाष चंदर बोस एक प्रो फ सर और चंदे र् शेखर आ जा द कि सी संस ् कृत विधा पीठ में पढ़ा रहे होते 
 किन्तु देश को प्यार कर ने वाले खुद से ज्यादा देश की फ़िक्र कर तें हैं 
 अपनी आ न बा न और शान देश हित में झोक कर देते हैं 
 व ही स्वामी जी ने भी कि या 
 आज की स्थिति भी कुछ कुछ वैसी ही है मुठी भर भ्रष्ट और गद्दार नेता देश को नोच नोच कर खा रहें हैं और हर कोई अपना काम कर रहा है 
 वो चाहते भी यही हैं की हर कोई अपना काम करें ताकि कोई उन के काम में बाधा ना ब ने और उन का काम है देश को लूट ना 
 किन्तु जिस के दिल में भारत माता वि राज मान हो 
 वो अपनी माँ का इस तरह बलात् कार होते नहीं देख सकता 
 किन्तु उन से कुछ गल ति याँ हुई जिन का जिक्र मै अपने अगले ब्लॉग में करूँगा 
 तब उन्हों ने देश को भ्रष्ट ा चार ् के प्रति जागरूक ता अभियान शुरू कि या जहाँ उन के साथ लाखों लोग जुड़ते चले गए 
 उस वक्त हमारी मिडिया टी . आर पी 
 और अपने आप को दूसरों से बेहतर बता ने की होड़ में लगी थी 
 इसी लिए कि सी भी नेशनल चैनल पर उन्हें नहीं दिख या गया 
 उस के बाद स्वामी जी ने २७ फ़रवरी को विशाल रैली की जिस में बड़े बड़े विचार को ं ने अपनी राय रखी पर मिडिया के लिए ये सब कोई न्यूज़ नहीं थी 
 पहले अंडा आ या या मुर्गी यह प्रश्न हजारों वर्षों से लोगों को परेशान करता आ या है 
 ले कि न अब व ै ज्ञान िक ों ने इस यक्ष प्रश्न का जवाब ढूंढ़ निकाल ने का दावा कि या है 
 शे फील्ड और वारविक विश्व विद्या लय के व ै ज्ञान िक ों के एक दल ने दावा कि या है कि धरती पर अंडे से पहले मुर्गी का जन्म हुआ था 
 व ै ज्ञान िक ों ने पा या कि ओ वो क् लाइ डि न नाम का प्रो टी न अंडे के खोल के निर् मा ण में बहुत महत्व पूर्ण होता है 
 उन्हों ने बताया कि यह प्रो टी न मुर्गी के अंडा शय से पैदा होता है इस लिये पहले अंडा आ या या मुर्गी अब यह पहेली सुलझ गई है 
 व ै ज्ञान िक ों ने कहा कि पहले मुर्गी आई और इस के बाद अंडा पैदा हुआ 
 डे ली एक्स प्रेस के मु ता बिक रि पोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि प्रो टी न पैदा कर ने वाली मुर्ग ि या ं पहले कैसे आईं 
 इस दल ने अंडे के खोल को देख ने के लिये अत्या धुन िक कं प्यू ट रहे क् टर का इस ् ते माल कि या 
 शोध से जुडे़ प्रमुख व ै ज्ञान िक डॉ ण् को लि न फ्री मै न ने कहा लम्बे समय से यह संदेह बना हुआ था कि अंडा पहले आ या ले कि न अब हमारे पास व ै ज्ञान िक सबूत है जो हमें बताता है कि मुर्गी पहले आई 
 इस से पहले डा पूनम सिंह ने के दार के काव्य - व्यक्त ित ् व में मानवीय सं वे द ना ओ को रे खां कि त करते हुए कहा कि के दार की कविता कठिन जी व न - संघर्ष ों के बीच अदम्य जि जी विष ा बना ये रख ने वाले स्त ् रो तो ं की खोज करती है वे मूलतः कि सानी सं वे द ना के कवि हैं उन की कविता ए ँ उन के बाँदा जन पद की संस ् कृति से जुड़ी हुई है 
 ना गा र् जु न के बाँदा आ ने पर उन्हों ने जो कविता लिखी उस में उन के गाँव का पूरा चित्र प्रति बिम्ब ित है 
 के दार का समस्त कवि कर्म अभि जन के दायरे से बाहर जा कर गरीब कि सा न ों कामगार मजदूर ों दलित - स् त्रि यों के पक्ष में खड़ा है 
 के दार का कवि सामंती वर्च स्व का अति क्रम ण कर मान व मूल्य ों की व का लत करता है तथा मुक्ति बोध की तरह अभि व्यक्त ि के खतरे उठा ने को सदैव तत् पर है 
 मुझे बरबस कोई तुम ् हारी हाँ में हाँ मिला ने को प्रे रित कर रहा हूँ 
 चलो यह भी दे दिया 
 हे नारी रत्न मेरी बात मान लो 
 बहुत दूर आ गयी हो 
 आगे का मार्ग कि सीमा न व के लिए असम्भव है 
 अब तो लौट जा 
 मेरी एक दो बातें और सुन लीजिए 
 एक तो मैं पति के समीप हूँ अतः दूरी का तो कोई नाम ही नहीं और न मुझे उस का अनुभव हो रहा है 
 दूसरी बात आप वि व स्वान सूर्य के पुत्र हैं और व ै व ष् व त् ‌ कह लाते हैं 
 सब पर समान न्याय कर ने वाले होते हैं 
 आप तो सज्जन शि रो मणि हैं आप कृपा के जल धर हैं करुणा के सागर हैं 
 और क्या इस में भी दो राय है कि संतों के साथ सा तक दम चल ही दिया जाय तो मित्र ता हो जाती है - " सतां हि सप्त प दे शु मैत्री " 
 अतः आप मेरे पर म सुहृद भी हुए 
 आप सन्त हैं कृपालु हैं सुहृद हैं न्यायी हैं धर्म राज हैं इस लिए आप पर वि श्वास कर के आप से कुछ कह ने का साहस करती हूँ 
 दे वि यह मेरी तीसरी पराजय है 
 एक बार ा हारा था ऋषि पुत्र मार कण ् डे य से और उसे अमरत्व का वरदान मिला 
 दूसरी बार हारा ऋषि पुत्र न चि के ता से वह मेरी यमपुरी से अमरत्व का ज्ञान ले कर चिरंजी वी हो लौटा 
 और तीसरी बार हारा नारी सा वि त् री से 
 मेरे पास से तुम ने अपने पति को प्रेम से छीन लिया है 
 मैं हारा हूँ ले कि न प्र सन् न ता से खेद से नहीं 
 नियम में बँधा हुआ आज नियम तोड़ दे रहा है 
 व च न बद्ध यमराज तुम्हे ं तुम ् हारा पति दे रहा है 
 जा ! सा वि त् री नाम को पति व्रत ा की रेखा में सब से ऊँची कर दे 
 आज की तिथि से तुम ् हारे पति को चार सौ वर्षों की आयु दे रहा हूँ 
 पुत्र ि पवित्र कि ये कुल दो ऊ - अपने पिता और अपने पति दोनों को स नाथ कर दे ने वाली सा वि त् री तुम ् हारी जय हो 
 ले कि न कुल मिला कर कोई डे़ढ ़ सौ राग ही प्र चलित हैं 
 मामला बहुत पेचीदा लगता है ले कि न यह के व ल साधारण गणित की बात है 
 आरोह में 7 और अवरोह में भी 7 स्वर हो ने पर ‘ सम् पूर्ण - सम् पूर्ण जाति ’ बनती है जिस से के व ल एक ही राग बन सकता है 
 वहीं आरोह में 7 और अ व रोग में 6 स्वर हो ने पर सम् पूर्ण ष ा ड व जाति बनती है 
 